दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के लिए हर साल जिम्मेदार ठहराए जाने वाले किसानों में अब बदलाव हो रहा है। ये जागरूकता का असर ही है कि इस बार हरियाणा में खेतों में पराली जलाने के मामले कम सामने आ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले अब तक तीन गुना कम केस सामने आए हैं। बता दें कि पिछले साल इस समय तक 250 से अधिक स्थानों पर पराली जलाई गई थी, लेकिन इस साल प्रदेश में कुल 80 स्थानों पर ही पराली जलने की रिपोर्ट आई है। कृषि विभाग के अधिकारी इसे सकारात्मक संकेत बता रहे हैं।
वर्ष 2020 में हरियाणा में 15 सितंबर से 12 अक्टूबर तक 1213 स्थानों पर पराली जलाई गई थी। 2021 में इसी अवधि में 298 मामले रिपोर्ट किए गए। इस साल केवल 80 स्थानों पर ही पराली जलाई गई है। हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसेक) द्वारा पराली जलाने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग को फोटो समेत अपडेट दिया जा रहा है। हरसेक की रिपोर्ट के अनुसार कुल 80 केसों में सबसे अधिक मामले कुरुक्षेत्र 25 और करनाल में 25 आए हैं।
इसके अलावा अंबाला 10, जींद 8, कैथल 8, फतेहाबाद 3, पानीपत-सोनीपत 2-2, पलपल और यमुनानगर में 1-1 स्थान पर पराली जलाई गई है। शेष 12 जिलों में एक स्थान पर भी पराली जलाना रिपोर्ट नहीं हुआ है। इस बार बेमौसमी बारिश के चलते धान की कटाई भी प्रभावित रही है। इस कारण सितंबर में प्रदेश में पराली जलाने का कोई केस सामने नहीं आया। अभी धान कटाई का सीजन जोरों पर है। अक्तूबर माह में ही पराली जलाने के 80 मामले सामने आए हैं। इनमें 5 अक्तूबर को 24 और 6 को 26 स्थानों पर पराली जलाई गई।
विशेष अभियान का असर है इस बार
हरियाणा सरकार द्वारा चलाए गए विशेष अभियान का असर है कि इस बार पराली जलाने के मामले कम सामने आ रहे हैं। खेत में पड़े पराली के बंडल इस बात के गवाह हैं कि किसानों ने पराली का प्रबंधन किया है। साथ ही पराली बेचकर अपनी आय बढ़ाई है। इससे पर्यावरण भी बचा है, दूसरा जमीन की उर्वरता भी बनी रही है। कृषि विभाग की तरफ से अपील है कि अपने आस पास के पड़ोसी किसानों को भी पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करें।
-हरदीप सिंह, महानिदेशक, कृषि विभाग