पंजाब विधानसभा की ओर से बुधवार को पंजाब प्राइवेट हेल्थ साइंसेज एजुकेशनल संस्थाएं (दाख़िले के नियम, फीस निर्धारण और आरक्षण) संशोधन बिल, 2020 को पास करके निजी मेडिकल यूनिवर्सिटियों की मनमर्जी पर अंकुश लगा दिया है। यह जानकारी वीरवार को मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री ओपी सोनी ने दी।
उन्होंने बताया कि अब राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों/डीम्ड यूनिवर्सिटियों समेत प्राईवेट मेडिकल संस्थानों में दाख़िला, फीस निर्धारण और आरक्षण राज्य सरकार की हिदायतों के अनुसार होगा। एक्ट में संशोधन के उद्देश्यों और कारणों का विवरण देते हुए मेडिकल शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब तक उक्त एक्ट पंजाब के निजी मेडिकल कॉलेजों में ही फ़ीसों, दाख़िलों और आरक्षण निर्धारण को नियंत्रित करता था।
दरअसल, आदेश यूनिवर्सिटी ने 2006 के एक्ट के ख़िलाफ़ अदालत में याचिका दायर की थी, जिस पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मई 2014 में कहा था कि आदेश यूनिवर्सिटी और अन्य प्राइवेट यूनिवर्सिटियां, पंजाब के मेडिकल शिक्षा व अनुसंधान विभाग के एक्ट 2006 के अधीन नहीं आते और केवल निजी मेडिकल संस्थाओं पर यह लागू होता है न कि प्राइवेट संस्थाओं पर।
मेडिकल शिक्षा मंत्री ने कहा कि तत्कालीन राज्य सरकार ने पता नहीं किन कारणों से प्राइवेट यूनिवर्सिटियों को उक्त एक्ट के अधीन लाने के लिए कोई कोशिश क्यों नहीं की।अब लोगों के हित में कैप्टन सरकार ने निजी यूनिवर्सिटियों को एक्ट के घेरे को लाने का फ़ैसला किया और इसमें संशोधन की प्रस्तावना की। सोनी ने कहा कि विधानसभा से मंजूरी मिलने से अब सभी निजी स्वास्थ्य संस्थाओं/यूनिवर्सिटियों में दाख़िले के नियम, फीस निर्धारण और आरक्षण के लिए एक समान कानून होगा, जो केंद्र या राज्य सरकार द्वारा स्थापित और प्रशासित नहीं हैं।
इसमें एक संस्था शामिल है, जिसमें किसी भी यूनिवर्सिटी, डीम्ड यूनिवर्सिटी या कॉलेज, चाहे सहायता प्राप्त या बिना सहायता प्राप्त, ग़ैर-अल्पसंख्यक या किसी व्यक्ति या व्यक्तियों या ट्रस्ट या कोई अन्य निजी संस्था, एजेंसी या संस्था या संगठन द्वारा नियंत्रित या प्रशासित या चलाया जा रहा है, जो संस्था किसी भी कोर्स या स्वास्थ्य विज्ञान के कोर्सों के लिए डिग्री या डिप्लोमा करने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने की गतिविधि को चलाती है।