चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने सूबे के विभिन्न फोकल पॉइंटों में स्थित औद्योगिक प्लॉटों से डिफॉल्टर अलाॅटियों को बड़ी राहत दी है। अब एक अतिरिक्त साल में वे अपनी इकाई को उत्पादन करने की स्थिति में ला सकते हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम लिमिटेड की ओर से तय मानकों का पालना करना होगा। विभाग ने इस संबंधी मंगलवार को आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग के प्रबंधक निदेशक की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि उन्हें प्लॉटों पर निर्माण संबंधी सारी औपचारिकताएं 30 सितंबर, 2024 तक पूरी करनी होंगी। इसके बाद किसी को कोई मौका नहीं दिया जाएगा। साथ ही इस समय अवधि में वह निर्माण नहीं कर पाते हैं, तो उनकी साइटों को बिना किसी नोटिस से रद्द कर दिया जाएगा।
सितंबर में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विभिन्न जिलों में जाकर उद्योगपति मिलनी आयोजित की थी। इस दौरान उन्होंने राज्य की इंडस्ट्री की स्थिति सुधारने के लिए जहां उद्योगपतियों से सुझाव लिए थे वहीं उनकी दिक्कतों को भी सुना था। इस दौरान उद्योपतियों ने दलील थी कि सरकार द्वारा तय समय में जो प्लॉटों में निर्माण नहीं कर पाए हैं, उन्हें एक साल की अवधि दी जाए। मुख्यमंत्री ने मौके पर एलान कर अधिकारियों को इस दिशा में कार्रवाई के आदेश दिए थे।
हालांकि विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि निर्माण के लिए समय अवधि में वृद्धि औद्योगिक प्लॉट की वर्तमान कीमत के एक फीसदी एक्सटेंशन फीस चार्जेबल के भुगतान के पास ही दी जाए। इसके अलावा कुछ अन्य शर्तें भी तय की गई हैं। डिफाॅल्टर अलॉटियों को 31 मार्च 2024 तक तय दस्तावेजों के साथ बिल्डिंग प्लान जमा करवाने होंगे। साइट पर 30 जून 2024 तक निर्माण करना होगा। साथ ही 30 सितंबर 2024 तक इकाई को उत्पादन में लाना होगा। इसके अलावा प्लॉट धारक को बढ़ी हुई भूमि लागत सहित प्लॉट की कीमत के संबंध में लागू ब्याज, जुर्माना राशि सहित जमा कराना होगा।