पंचकूला। हरियाणा के इंडस्ट्रियलिस्टों को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने बड़ी राहत दी है। अब इंडस्ट्री के पॉल्यूशन की जांच एक बार होगी और इसके बाद इंडस्ट्रियलिस्ट एकदम निश्चिंत होकर अपना काम कर सकेंगे। इतना ही नहीं, जिन इंडस्ट्री की पॉल्यूशन जांच की जाएगी उनके लिए बाकायदा कंप्यूटराइज्ड ड्रा का माध्यम अपनाया गया है।
हरियाणा की 156 इंडस्ट्री की जांच पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अफसरों द्वारा मई माह में की जाएगी। बोर्ड अधिकारियों को सख्त निर्देश हैं कि जिन इंडस्ट्री का ड्रा निकाला जाएगा उनको उसी माह में जांचा जाए। पंचकूला में शुक्रवार को हरियाणा पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा ड्रा निकाला गया।
इस ड्रा में हरियाणा की 156 इंडस्ट्री को जांच के लिए सेलेक्ट किया गया है। बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि जांच की अवधि अब तीन, पांच और सात साल की है। इंडस्ट्री का इस अवधि में एक बार ही निरीक्षण होगा। हां, यदि कोई शिकायत करता है तो उसका निरीक्षण किया जा सकता है।
पंचकूला रीजन में सात इंडस्ट्री ऑरेंज
हरियाणा पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी एस नारायणन ने कहा कि ड्रा की व्यवस्था उद्यमियों को परेशानी से मुक्त करने के लिए की गई है। ड्रा के लिए कंप्यूटराइज्ड प्रोग्राम तैयार किया गया है। ड्रा को निकालने के समय हरियाणा चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री पंचकूला के अध्यक्ष विष्णु गोयल को बुलाया गया था। उन्होंने बताया कि पंचकूला रीजन में सात इंडस्ट्री ऑरेंज केटेगरी,, छह रेड केटेगरी और एक 17 केटेगरी की इंडस्ट्री को जांच के लिए सेलेक्ट किया गया है।
सेंसर से पता चलेगा पॉल्यूशन
अब हरियाणा की सौ इंडस्ट्री को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा पानी और एयर पॉल्यूशन के लिए हरियाणा की बड़ी इंडस्ट्री को आनलाइन मानीटरिंग डिवाइस लगाने के लिए कहा है। हरियाणा की सौ इंडस्ट्री को इसके आदेश दिए गए हैं। अब तक पचास ने ही आनलाइन मानीटरिंग डिवाइस के लिए सेंसर लगाया है। यह सेंसर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के साफ्टवेयर के साथ कनेक्टेड होता है जो कि प्रदूषण की मात्रा ज्यादा होते ही संकेत दे देता है और विभाग द्वारा इंडस्ट्री को हिदायत दे दी जाती है।
17 कैटेगरी-यह सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली कैटेगरी है। इसके लिए जांच का दायरा तीन साल का है। इसमे तीन साल में एक बार जांच होगी।
रेड कैटेगरी-यह 17 कैटेगरी से कम प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री है। इसके लिए जांच का दायरा पांच वर्ष का है। जिसमें पांच साल में एक बार जांच होगी।
ऑरेंज कैटेगरी-यह सबसे कम पॉल्यूशन फैलाने वाली इंडस्ट्री हैं, जिसमें सात साल में एक बार जांच होगी।