चंडीगढ़। मेडिकल कॉलेज (जीएमसीएच-32) के चिकित्सकों ने एक मजदूर के कटे हुए दोनों पैरों को ऑपरेशन कर 10 घंटें में जोड़कर कमाल कर दिया है। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति अब सामान्य है और उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।
मरीज पंजाब के राजपुरा का है। बीती आठ जुलाई को हर दिन की तरह राजपुरा का एक मजदूर बोरवेल मशीन पर काम कर रहा था। उसी दौरान अचानक उसके दोनों पैर कट गए। एक पैर जूते के साथ अलग हो गया जबकि दूसरे पैर की कुछ नसें ही जुड़ी हुई थीं। रिश्तेदार व तीमारदार महज डेट घंटे में उसे लेकर सरकारी मेडिकल कॉलेज चंडीगढ़ पहुंच गए। जहां डॉ. मितेश बेदी, डॉ. सिद्धार्थ गर्ग और डॉ. रोहित जिंदल ने पूरे केस को समझा और बिना देरी किए तुरंत ही ऑपरेशन शुरू कर दिया। लगभग दस घंटे तक यह ऑपरेशन चला। इस दौरान दोनों पैरों की नसों को कटे हुए हिस्से की नसों से जोड़ा गया। कम से कम समय के भीतर हड्डियों, छोटी रक्त वाहिकाओं, तंत्रिकाओं, मांसपेशियों और टेंडन की मरम्मत की गई। डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और ऑपरेशन सफल रहा। आज की स्थिति देखें तो मरीज के दोनों पैर मूवमेंट करने लगे हैं। रिकवरी तेजी से हो रही है। स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। माना जा रहा है कि जल्द से जल्द मरीज सामान्य स्थिति में होगा।
मेडिकल कॉलेज ने इस तरह बनाया इतिहास
जीएमसीएच-32 का दावा है कि पीजीआई में पिछले एक दशक में ऐसा पेचीदा केस नहीं आया है। दुनिया भर के अस्पतालों के रिकॉर्ड को देखते हुए भी यह पाया गया है कि दो से तीन केस ही पूरी दुनिया में ऐसे आए हैं और ऑपरेशन के जरिए सफलता हासिल हुई है। पीजीआई के चिकित्सकों ने यह ऑरेशन सफल करके इतिहास रच दिया है।
ऐसे मामलों में पहले कुछ घंटे होते हैं अति महत्वपूर्ण
सर्जरी करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि ऐसे मामलों में पहले कुछ घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं अन्यथा सर्जरी में जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। जो मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे केस जिनमें कटा हाथ, कटा पैर या शरीर का कोई अन्य हिस्सा कट गया हो तो कटे हुए हिस्से को मरीज के साथ जल्द से जल्द हास्पिटल में पहुंचना जरूरी होता है। डाक्टरों के मुताबिक, अगर कटे हिस्से को दो से तीन घंटे के भीतर मरीज के साथ हास्पिटल पहुंचा दिया जाए तो उसे सर्जरी के द्वारा जोड़ा जा सकता है। इस दौरान इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि कटे हुए अंग को बर्फ के अंदर या आइस पैक में रखकर हास्पिटल लाया जाए। समय से कटे पैर व मरीज के पहुंचने से यह सर्जरी आसान हुई और उसे जीवनदान मिल गया।
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को ऐसे मिली सफलता
- इस केस में प्लास्टिक सर्जन, संवहनी सर्जन और एक हड्डी रोग विशेषज्ञ की टीम द्वारा सर्जरी के दो घंटे के भीतर सर्जरी शुरू कर दी गई थी, जो अपने में महत्वपूर्ण थी। तमाम चिकित्सक ऐसे होते हैं जो दो घंटे में केस तक नहीं समझ पाते लेकिन यहां काफी तेजी से चिकित्सकों ने काम किया।
- डॉक्टरों ने कहा कि साहित्य की समीक्षा करने के बाद वे कह सकते हैं कि ऐसी सर्जरी दुर्लभ परिस्थितियों में की गई है।
- अलग हुए अंगों को जोड़ना अपने में कठिन काम होता है। चिकित्सकों ने इसे बखूबी समझा और इलाज में देरी नहीं की। चुनौतियां और जटिलताएं बहुत थीं लेकिन वह उनकी मेहनत के सामने नहीं टिक पाई।
- इस रोगी को आने वाले समय में कुछ पुनर्निर्माण प्रक्रियाओं की आवश्यकता हो सकती है और आईसीयू अनुभाग में भर्ती भी किया जा सकता है।
- डॉक्टरों ने कहा कि स्किन ड्राफ्ट मरीज जैसी पुनर्निर्माण प्रक्रियाओं का संचालन ठीक से होने के बाद मरीज सामान्य जीवन जीने में सक्षम होते हैं।