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केंद्र को भा गई पंचकूला की अदरक, 'एक जिला-एक पैदावार' में शामिल

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खेती के बाद निकाला गया अदरक। - फोटो : PKL OFFICE
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पंचकूला। अब केंद्र सरकार को भी पंचकूला की अदरक का स्वाद भा गया है। जी हां, यही वजह है कि पंचकूला को भारत सरकार की कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा ‘एक जिला-एक पैदावार’ अभियान के अंतर्गत अदरक की पैदावार के लिए चुना है। इसके अलावा मोहाली को दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद जबकि चंडीगढ़ को बेकरी के लिए चुना गया है। केंद्र सरकार द्वारा देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 26 फरवरी 2021 को यह लिस्ट जारी की गई थी।
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पंचकूला में पहले ही से अदरक की खेती होती है। पंचकूला के मोरनी खंड अदरक के लिए जाना जाता है। यहां दवा बनाने में उपयोग की जाने वाली सौंठ के लिए अदरक की पैदावार होती है। मोरनी में प्रतिवर्ष दो हजार क्विंटल से ज्यादा अदरक का उत्पादन होता है। यह अदरक सामान्य रूप से खाने में इस्तेमाल नहीं की जाती है बल्कि इसके माध्यम से सौंठ बनाई जाती है।
पंचकूला का यह पहाड़ी क्षेत्र अब इसी वजह से अपनी खास पहचान बना चुका है। इसी वजह से केंद्र सरकार ने भी पंचकूला को अदरक के उत्पादन के लिए एकदम उपयुक्त पाया है। पंचकूला को खासतौर से मोरनी की जलवायु अदरक उत्पादन के लिए एकदम उपयुक्त है। पंचकूला के मोरनी के साथ बरवाला और रायपुररानी के मैदानी इलाकों में भी अदरक का उत्पादन किया जाता है लेकिन मैदानी इलाकों में पैदा होने वाली अदरक का प्रयोग खाने में ज्यादा किया जाता है।
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मोरनी में करते हैं उत्पादन
मोरनी के करीब पांच सौ किसान अदरक की खेती करते हैं। इसकी बिजाई अप्रैल में हो जाती है जबकि इसकी कटाई के लिए अक्तूबर-नवंबर माह का समय उपयुक्त होता है। अदरक गर्म होती है लिहाजा सर्दियों में इसकी मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में अगर यहां पर अदरक की खेती पर मौसम की मार नहीं पड़ती है तो इसकी खेती अच्छी हो सकती है।
अरसे से कर रहे हैं खेती
मोरनी में अदरक की खेती करने वाले हरदेव दत्त शर्मा ने कहा कि उनके परिवार में काफी समय से अदरक की खेती की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसकी खेती चुनौतीपूर्ण है। इसमें हर बात का ध्यान रखना पड़ता है। इसको खुद हाथ से बोना पड़ता है। उसके बाद उसके ऊपर घास डाल दी जाती है। धीरे-धीरे घास खाद में मिल जाती है। इससे अच्छी क्वालिटी की अदरक पैदा होती है।
दवाओं में होती है उपयोग
अदरक उत्पादक नरदेव सिंह राणा ने बताया कि मोरनी में किए जाने वाले अदरक से सौंठ बनाई जाती है। इसका प्रयोग फार्मा कंपनियां दवाओं को बनाने में करती हैं। इसलिए यहां की अदरक की डिमांड काफी है। चतर सिंह के अनुसार केंद्र द्वारा अदरक उत्पादन के लिए पंचकूला को चुनना महत्वपूर्ण बात है। मोरनी का पहाड़ी मौसम इसके एकदम अनुकूल है।
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हरियाणा के इन जिलों में इन पर फोकस
अंबाला-प्याज
भिवानी-खट्टे फल
चरखी दादरी-खीरा
फरीदाबाद-खीरा
फतेहाबाद-खट्टे फल
गुरग्राम-आंवला
हिसार-दुग्ध और दुग्ध उत्पाद
झज्जर-अमरूद
जींद-पॉल्ट्री
कैथल-दुग्ध और दुग्ध उत्पाद
करनाल-पत्तेदार सब्जियां
कुरुक्षेत्र-आलू
महेंद्रगढ़ और नारनौल-साइट्रस
मेवात और नूंह-टमाटर
पलवल-टमाटर
पंचकूला-अदरक
पानीपत-मूली
रेवाड़ी-तेल
रोहतक खीरा
सोनीपत-मटर
सिरसा किन्नू
यमुनानगर-आम
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