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फर्जीवाड़ा : मूक बधिरों के स्थान पर लगाए दिए दृष्ठि-अस्थि बाधित

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चंडीगढ़। हरियाणा में वर्ष 2018 में निकली ग्रुप डी की भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आया है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने मूक बधिरों के लिए आरक्षित पदों पर दृष्टि और अस्थि बाधित समेत अन्य अपात्र लोगों को नौकरी पर लगा दिया। इस मामले में अब जांच कराने के बाद हरियाणा दिव्यांगता राज्य आयुक्त ने कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने गलत तरीके से नौकरी लगे अभ्यिर्थियों को नोटिस जारी किया है क्यों न आपको नौकरी से बर्खास्त किया जाए। नोटिस का जवाब आने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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गौर हो कि वर्ष 2018 में हरियाणा में ग्रुप डी की 18,218 पदों पर भर्ती निकली थी। भर्ती में दिव्यांग जनों के लिए अलग-अलग श्रेणी में आरक्षित थे। इनमें 132 पद मूक और बधिरों के लिए आरक्षित थे। भर्ती के बाद आयोग के पास शिकायत आई कि इस भर्ती में अपात्र लोगों को नौकरी लगाई गई, जबकि पात्र लोग नौकरी से बाहर हो गए हैं। आयुक्त ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए थे। 21 विभागों में से 10 विभागों ने कर्मचारियों के प्रमाण पत्रों की रिपोर्ट आयोग को भेज दी है। रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने मूक बधिरों के स्थान पर या तो अस्थि और दृष्टि बाधित द्वियांगजनों को नौकरी लगा दिया, या फिर वह पात्रता पूरी नहीं कर रहे हैं। मूक-बधिर के लिए 40 प्रतिशत की शर्त थी, लेकिन जो नौकरी लगे हैं, उनके प्रमाण पत्रों में प्रतिशतता इससे नीचे है या फिर उनके प्रमाण पत्र ही फर्जी पाए गए हैं। मामले की सुनवाई करते हुए हरियाणा द्वियांगता आयुक्त राजकुमार मक्कड़ ने अपात्र कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने के लिए नोटिस जारी किया है। शेष विभागों की रिपोर्ट आने के बाद उन पर फैसला लिया जाएगा।
बता दें कि भर्ती के समय भी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर दिव्यांग कोटे की नौकरियों में हुए फर्जीवाड़े की शिकायतें मिलीं थीं। शिकायत मिलने के बाद सरकार ने दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों की जांच कराने के निर्देश सभी विभागों को दे दिए थे, लेकिन कोई अमल ही नहीं हुआ था। बाद में आयुक्त ने इस पर संज्ञान लिया और दोबारा से जांच कराई।
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चार श्रेणियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र पर संदेह
दिव्यांग कोटे के तहत नौकरी पाने के लिए चार श्रेणियों में बनाए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्रों पर सवाल उठे थे। आरोप है कि सरकार के दिशा-निर्देशों पर ये खरा नहीं उतरते। विभागों को संदेह है कि प्रमाण पत्र फर्जी हैं। इसलिए दोबारा से जांच कराई जा रही है। जिन श्रेणियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र पर उंगली उठी हैं, उनमें विजुअली हैंडीकैप्ड (वीएच), ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड (ओएच), बोन मिनरल डेंसिटी हैंडीकैप्ड (बीएमडी) और हियरिंग हैंडीकैप्ड (एचएच) श्रेणियां शामिल हैं।
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