खैर तस्करी के तार सोलन तक जुड़े, सीएम के निर्देश पर बनी एसआईटी ने एक हफ्ते में खोला राज
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। आसरेवाली में करीब 500 खैर के पेड़ों की अवैध कटाई और तस्करी के मामले में पुलिस ने विभाग के ही एक वन दरोगा (वन खंड अधिकारी) समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि इस तस्करी के तार सोलन तक जुड़े थे और पूरा नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी इमरान उर्फ मान्ना गिरोह का संचालन करता था, जबकि हिमाचल के सोलन निवासी दिलबहादुर लकड़ी खरीदकर आगे सप्लाई करता था। अली मोहम्मद उर्फ रोशन इस अवैध खेल में ट्रांसपोर्टर की भूमिका निभा रहा था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 क्विंटल 50 किलो खैर की लकड़ी, नकदी, पेड़ काटने के औजार और दो पिकअप गाड़ियां बरामद की हैं।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा वन दरोगा रघुविंद्र सिंह को लेकर हुआ। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी इमरान हर महीने उसे मोटी रिश्वत देता था, ताकि जंगल में बेखौफ कटाई हो सके। पुलिस ने दरोगा को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पुलिस कमिश्नर (एडीजीपी) शिवास कविराज को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद एसीपी क्राइम अरविंद कंबोज के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर आरोपियों को दबोचा।
कुल 11 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में कुल 11 आरोपियों को पकड़ा गया है जिनमें 8 पेड़ काटने वाले, 1 खरीदार, 1 ट्रांसपोर्टर और 1 वन अधिकारी शामिल है।
कोट
वन संपदा हमारी राष्ट्रीय धरोहर है। यह महज चोरी नहीं बल्कि संगठित पर्यावरणीय अपराध है। हमने न केवल सरगना और ट्रांसपोर्टर को पकड़ा है बल्कि विभाग के भीतर छिपे भक्षक को भी बेनकाब किया है। पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और इस गिरोह से जुड़े हर शख्स को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
शिवास कविराज, पुलिस कमिश्नर (एडीजीपी), पंचकूला