17.55 एकड़ अटैच भूमि की 7.87 करोड़ में बिक्री का आरोप, पूर्व तहसीलदार विक्रम सिंगला के खिलाफ तीसरा मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पर्ल ग्रुप (पीजीएफ/पीएसीएल) की अटैच और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत प्रतिबंधित जमीन की कथित अवैध बिक्री के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने तत्कालीन तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी, एक सरकारी अधिकारी और जमीन मालिक समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पूर्व तहसीलदार विक्रम सिंगला के खिलाफ यह तीसरी एफआईआर बताई जा रही है।
एसीबी की जांच में आरोप है कि अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए भू-माफियाओं और जमीन मालिकों के साथ मिलीभगत कर करीब 17.55 एकड़ प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री करवा दी, जबकि उक्त भूमि जांच एजेंसियों द्वारा अटैच थी और उस पर बिक्री, हस्तांतरण व रजिस्ट्रेशन पर रोक लगी हुई थी।
जांच एजेंसी के अनुसार पर्ल ग्रुप और उसकी सहयोगी कंपनियों की संपत्तियां निवेशकों को धनवापसी के उद्देश्य से अटैच की गई थीं। इन संपत्तियों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने भी बिक्री, म्यूटेशन और अन्य प्रकार के लेन-देन पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। लोढा कमेटी, विक्रमजीत सैन कमेटी और जांच एजेंसियां समय-समय पर राजस्व अधिकारियों को इसकी जानकारी भी देती रही थीं।
रिकॉर्ड में दर्ज थी बंदी, फिर भी हटाया गया प्रतिबंध
जांच में सामने आया कि तहसील रायपुररानी के राजस्व रिकॉर्ड में वर्ष 2016 और 2019 में रपट दर्ज कर संबंधित भूमि को अटैच और प्रतिबंधित दर्शाया गया था। इसके बावजूद दिसंबर 2025 में गगनप्रीत सिंह के एक प्रार्थना पत्र के आधार पर तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, कानूनगो दीपक कुमार और पटवारी नरेंद्र कुमार ने कथित रूप से मिलीभगत कर राजस्व रिकॉर्ड से बंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
आरोप है कि 16 दिसंबर 2025 को बंदी हटाने की रपट दर्ज की गई और उसी दिन विरासत इंतकाल को मंजूरी दे दी गई। इसके बाद जसप्रीत और कर्मजीत कौर द्वारा गगनप्रीत सिंह के पक्ष में जीपीए भी पंजीकृत कर दी गई।
तीन दिन बाद 7.87 करोड़ में हुई बिक्री
एसीबी के अनुसार 19 दिसंबर 2025 को करीब 17.55 एकड़ भूमि 7.87 करोड़ रुपये में विभिन्न खरीदारों को बेच दी गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया असामान्य तेजी से पूरी की गई ताकि प्रतिबंधित भूमि बेचकर आर्थिक लाभ अर्जित किया जा सके।
जांच में यह भी सामने आया कि भूमि को लेकर पहले प्रशासनिक स्तर पर पत्राचार हो चुका था। तत्कालीन एसडीएम पंचकूला ने तहसीलदार रायपुररानी से स्पष्टीकरण भी मांगा था। एक शिकायतकर्ता ने भी ऐसी भूमि की बिक्री रोकने का अनुरोध किया था, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई जारी रखी गई।
सरकारी अधिकारी की भूमिका भी जांच के घेरे में
एफआईआर में वर्तमान में एचएसवीपी में तैनात भूमि अधिग्रहण अधिकारी जोगिंद्र शर्मा को भी नामजद किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि रायपुररानी में पूर्व तैनाती के दौरान उन्हें पर्ल ग्रुप की विवादित जमीनों और उन पर लगी रोक की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद उन्होंने कथित रूप से जमीन के सौदों में भूमिका निभाई।
मामले में तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, कानूनगो दीपक कुमार और पटवारी नरेंद्र कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए हरियाणा सरकार से धारा 17-ए के अंतर्गत अनुमति प्राप्त की गई। इसके बाद एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।