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Panchkula News: किसान आंदोलन.....दिल्ली आंदोलन में बेटे को खोया, फिर भी मोर्चे पर डटे राजपाल सिंह

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बोले- बेटे की तरह किसानों के हक की लड़ाई में कभी पीछे नहीं हटूंगा
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अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। किसान आंदोलन में बेटे को खोने का दर्द दिल में लिए सुनाम के गांव अलीशेर कलां निवासी राजपाल सिंह एक बार फिर किसानों के संघर्ष में डटे हुए हैं। दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान उनके बेटे की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी। बेटे की मौत के बावजूद राजपाल सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और चंडीगढ़ में चल रहे सात दिवसीय किसान आंदोलन में किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
राजपाल सिंह ने नम आंखों से बताया कि दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान उनके बेटे बलविंदर सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। हालत गंभीर होने पर वह उसे बठिंडा लेकर गए, जहां उसका इलाज कराया गया। बाद में हालत में सुधार नहीं होने पर उसे चंडीगढ़ भी शिफ्ट किया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
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बेटे की मौत परिवार के लिए गहरा सदमा थी लेकिन राजपाल ने किसान संघर्ष से खुद को अलग नहीं किया। उन्होंने कहा कि बेटा बलविंदर सिंह भी किसान आंदोलन में हमेशा आगे रहता था। वह किसानों की मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करने से कभी नहीं डरता था। उसके लिए किसानों का हक सबसे ऊपर था। बेटे की इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वह खुद भी हर किसान संघर्ष में शामिल होते रहेंगे।
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राजपाल ने कहा कि बेटे को खोने का दर्द कभी कम नहीं होगा लेकिन किसानी और किसानों के अधिकारों की लड़ाई को बीच में छोड़ना भी उनके लिए संभव नहीं है। बेटा मोर्चे पर आगे रहता था, अब उसकी आवाज बनकर मैं किसानों के साथ खड़ा हूं। चंडीगढ़ में चल रहे सात दिवसीय आंदोलन में राजपाल जैसे कई किसान अपने व्यक्तिगत दुख और परेशानियों को पीछे छोड़कर किसानों की मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं जिसमें राजपाल भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब बेटे के बच्चों का भार भी उन पर है इसलिए अब किसानी संघर्ष के साथ उन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी उनकी है।
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