किसान आंदोलन पंजाब में होना चाहिए, क्योंकि पंजाब सरकार ने किसानों का 90 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ नहीं किया है। यह विचार पंजाब भाजपा की किसान मोर्चा की चंडीगढ़ में हुए एक दिवसीय प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद राजकुमार चाहर ने व्यक्त किए। उन्होंने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार किसानों की जमीनों का रेट कम करने की साजिश रच रही है।
चंडीगढ़ स्थित सेक्टर 37 में भाजपा मुख्यालय में आयोजित बैठक में मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विशेष रूप से उपस्थित हुए। चाहर ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा संशोधित कृषि कानून गोल्डन कानून हैं, क्योंकि इसके जरिए देश के छोटे किसानों को छोटे-छोटे समूहों में संगठित कर उन्हें केंद्र सरकार की तरफ से बिना ब्याज सहायता राशि उपलब्ध करवा कर अपनी फसल को अपने पास की मंडी से लेकर देश के किसी भी हिस्से में अपनी मर्जी की कीमत पर किसी को भी बेचने की आजादी मिलेगी।
उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा किसानों में भ्रम फैला कर किसान आंदोलन को खड़ा किया गया है। अब विपक्ष और समाज विरोधी तत्वों द्वारा राजनीतिक स्वार्थों के चलते आंदोलन को खत्म नहीं होने दिया जा रहा है। यह शांति और भाईचारक माहौल को खत्म करने की कोशिश है।
आज देश में हर चीज के दाम बढ़े हैं लेकिन पंजाब में जमीनों के दाम पिछले साढ़े चार साल में चार बार कम हुए हैं। जिस जमीन का कलेक्ट्रेट दाम 20 लाख था, उसे 5 से 10 लाख रुपये तक लाया गया है। पंजाब सरकार द्वारा रजिस्ट्री के रेट कम कर किसानों के साथ धोखा किया गया है।
इस अवसर पर मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बिक्रमजीत सिंह चीमा, संगठन महामंत्री दिनेश कुमार, प्रदेश भाजपा महासचिव डॉ. सुभाष शर्मा, राजिंदर मोहन सिंह छीना, राजिंदर कौर बाठ आदि उपस्थित रहे।