पंचकूला। सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में वीरवार को मौलीजागरां निवासी महिला की मौत पर परिजनों ने हंगामा पर डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। परिजनों ने पोस्टमार्टम के लिए शव देने से भी इनकार कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाया। बीमारी की पुरानी रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर डॉक्टरों ने शव परिजनों को सौंप दिया। इस दौरान इमरजेंसी में अफरा-तफरी का आलम रहा।
जानकारी के मुताबिक सेक्टर-6 सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के लिए 25 दिसंबर की सुबह 9 बजे हसीना खातून (40) को भर्ती कराया गया था। 26 दिसंबर की सुबह 10 बजे उनके पेट में दर्द हुआ। दर्द होने के बाद उनके बेटे हबीब अहमद और बेटी मोबीना दो बार नर्स और डॉक्टर को बुलाने गए। बेटी माेबीना ने बताया कि जब उन्होंने शोर मचाया तो इसके बाद ही डॉक्टर उनके पास पहुंचे। इलाज के थोड़ी देर बाद उनकी मां को हार्ट अटैक आ गया। इसके बाद उनकी मौत हो गई। मौत के बाद बेटे हबीब अहमद, बेटी मोबीना और अन्य रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती है।
इस कारण हसीना खातून की मौत हुई है। इस दौरान डॉक्टर शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने लगे। मरीज के परिजनों द्वारा हंगामा करने पर इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने इसकी सूचना सेक्टर-6 पुलिस चौकी को दी। चौकी से पहुंची पुलिस के समझाने पर परिजन पोस्टमार्टम के लिए शव देने को राजी हुए। परिजनों द्वारा बीमारी की पुरानी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद शव का पोस्टमार्टम नहीं हुआ। बेटे हबीब अहमद ने बताया उनके पिता की चालीस दिन पहले मौत हो गई थी। मौत के बाद हसीना खातून की तबीयत लगातार ठीक नहीं रहती थी।
तीन बीमारियों से पीड़ित थी हसीना खातून
पंचकूला इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर संदीप ने बताया कि महिला हसीना खातून तीन बीमारियों से पहले से पीड़ित थीं। उन्हें ब्लड प्रेशर, शुगर और टीबी की शिकायत थी। उनका इलाज किया जा रहा था। इलाज के बाद उन्हें हार्ट अटैक आ गया। अटैक होने के बाद डॉक्टरों की टीम ने कोशिश की लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
महिला पहले से कई बीमारियों से पीड़ित थी। अस्पताल प्रबंधन ने उनका इलाज किया। परिजनों के आरोप बेबुनियाद हैं। परिजनों को शव पहले की बीमारी के कार्ड और रिपोर्ट दिखाने के बाद दी गई है। -डॉ. मुक्ता कुमार, सीएमओ, पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर -6