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Panchkula News: दादा से पूछ रहे मासूम पोती-पोता, दिवाली पर फुलझड़ियां चलाने का वादा कर कहां चले गए पापा होमगार्ड जवान की मौत के बाद बेसहारा हुआ परिवार, पत्नी के कंधे पर आई परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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पिंजौर। हादसे में जान गंवा चुके होमगार्ड के जवान संदीप के बुजुर्ग पिता की झुर्रियों से घिरीं सूनी आंखें अपने इकलौते बेटे का अब भी इंतजार कर रहीं हैं। संदीप की मौत के बाद परिवार बेसहारा हो गया है। पत्नी और संदीप के बुजुर्ग पिता के कंधे पर परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी आ गई है। चालक के पद से सेवानिवृत्त 61 वर्षीय पिता ने टपकते आंसुओं को पोंछते हुए बताया कि एक साल की पोती और तीन साल पोता लगातार मुझसे पूछ रहे हैं कि पापा कहां चले गए हैं। उन्होंने कहा था कि दिवाली पर खूब फुलझडि़यां चलाएंगे। आप पापा को बुलाओ। मैं इन मासूमों को क्या बताऊं, जिन्हें मौत का मतलब ही नहीं पता है। कुछ साल पहले बड़े बेटे को खो चुके संदीप के पिता ने बताया कि उनका छोटा बेटा ड्यूटी करने गया था परंतु वापस नहीं आया। दूसरी ओर संदीप की पत्नी का पति की मौत के बाद रो रोकर बुरा हाल है। उन्होंने कहा कि पता नहीं अब उनका क्या होगा। वह अपने दोनों नन्हें बच्चों का पालन पोषण कैसे करेंगी। अब घर में कोई भी कमाने वाला नहीं है। यह हाल चूना भट्टी चंडीमंदिर निवासी संदीप कुमार के घर का है, जहां घर के चिराग की मौत के बाद मातम का माहौल है।


ड्यूटी पुलिस की तरह लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं
लोगों ने बताया कि होमगार्ड कर्मी मुस्तैदी से ड्यूटी करते हैं परंतु सुविधाएं नहीं मिलतीं। ड्यूटी के दौरान होमगार्ड के जवान की मौत पर परिवार बेसहारा हो जाता है, क्योंकि जवान को कुल सात लाख रुपये मुख्यमंत्री कल्याण कोष, होमगार्ड वेलफेयर फंड की ओर से प्राप्त होते हैं, यह भी मिलने में कई माह लग जाते हैं।
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कार्यक्षेत्र अमरावती चौकी, ड्यूटी के लिए भेजा दिया सिंह द्वार पंचकूला
मृतक संदीप कुमार का कार्यक्षेत्र अमरावती चौकी के अंतर्गत आता है तो उसे देर रात नाके पर ड्यूटी के लिए सिंह द्वार पंचकूला क्यों भेजा गया। यह विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान है। इसके अलावा होमगार्ड के कर्मियों को मानदेय आठ घंटे के लिए दिया जाता है परंतु ड्यूटी के घंटों तक की करवाई जाती है। संदीप ने आठ घंटे दिन में ड्यूटी की, इसके बाद देर रात 10 से 2 बजे तक लगने वाले नाके पर भेजा गया।

मृतक की पत्नी को नौकरी देने की मांग
मृतक के परिजनों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि मृतक की पत्नी को नौकरी दी जाए ताकि वह अपने मासूम बच्चों का पालन पोषण कर सके।
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