विशेष सचिव स्वास्थ्य कम टेस्टिंग इंचार्ज ईशा कालिया ने बताया कि यह एप स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार की गई है। इसका टेस्ट पटियाला और मानसा में किया गया है। इसमें करीब 20628 व्यक्तियों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 9045 व्यक्ति सांस की बीमारी से पीड़ित पाए गए और 1583 व्यक्ति खांसी/ बुखार/गले की खराश/सांस लेने में तकलीफ आदि से पीड़ित पाए गए।
518 गांव और 47 शहरों में सर्वेक्षण शुरू
मौजूदा समय में 518 गांवों और 47 शहरी वार्डों में सर्वेक्षण चल रहा है। इस दौरान 4.88 प्रतिशत व्यक्ति ब्लड प्रेशर, 2.23 प्रतिशत व्यक्ति शुगर, 0.14 प्रतिशत किडनी की बीमारियों, 0.64 प्रतिशत दिल की बीमारियों, 0.13 प्रतिशत टीबी और 0.13 प्रतिशत कैंसर से पीड़ित पाए गए हैं।
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आशा वर्करों को 4 रुपये प्रति व्यक्ति मेहनताना
आशा वर्कर और कम्युनिटी वॉलंटियरों को सर्वेक्षण के लिए 4 रुपये प्रति व्यक्ति मेहनताना/प्रोत्साहन दिया जाएगा और 500 घर कवर किए जाएंगे। विभाग द्वारा प्रत्येक वॉलंटियर को प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। एक सुपरवाइजर आशा वर्कर और कम्युनिटी वॉलंटियरों के काम की निगरानी रखेगा, जिसे वॉलंटियर आधार पर 5000 रुपये प्रति महीना दिया जाएगा।
पंजाब सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश के अनुसार, कोरोना से पीड़ित होने की स्थिति में राज्य के लोगों को अस्पतालों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। अब कोरोना के बिना लक्षण या कम लक्षण वाले सभी मरीजों को उनके घरों में ही एकांतवास में रखा जाएगा। ऐसे मरीजों को सरकार की तरफ से तय की गई शर्तों व नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
इस संबंध में सेहत विभाग द्वारा सभी जिलों में डिप्टी कमिश्नरों व सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर कहा गया है कि ऐसे मरीजों को सरकार द्वारा जारी अंडरटेकिंग देनी होगी। मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे तुरंत मेडिकल सहूलियत लेनी होगी।
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एकांतवास में 17 दिन रहने के बाद अगर 10 दिन में बुखार या कोई अन्य लक्षण दिखाई नहीं देता तो मरीज को ठीक मान लिया जाएगा और मरीज को कोई टेस्ट कराने की भी जरूरत नहीं होगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर किसी मरीज के पास घर में एकांतवास की सुविधा नहीं है तो वह कोविड देखभाल केंद्र में जा सकता है।