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Panchkula News: गिद्धों को बचाने के लिए सुरक्षित दवाओं और भोजन पर जोर

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पंचकूला। अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर रविवार को सेक्टर-3 स्थित आरलिस होटल में राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला आयोजित की गई। ‘संकट से पुनर्बहाली की ओर-भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया। कार्यक्रम में हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव राज्य मंत्री राव नरबीर सिंह समेत केंद्र व प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक, चिड़ियाघर विशेषज्ञ और संरक्षण विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का पर्यावरण संरक्षण मॉडल किसी एक प्रजाति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखकर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गिद्ध मृत पशुओं के शव खाकर प्रकृति की सफाई व्यवस्था बनाए रखने और पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में अहम भूमिका निभाते हैं। वर्ष 1990 के दशक से गिद्धों की संख्या में आई गिरावट के पीछे पशुओं के इलाज में इस्तेमाल कुछ दर्द निवारक दवाओं को प्रमुख कारण माना गया।
पिंजौर में 356 गिद्ध, 35 चूजों का सफल प्रजनन
इससे पहले भूपेंद्र यादव ने पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र (जेसीबीसी) का दौरा किया। हरियाणा वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के सहयोग से संचालित केंद्र में वर्ष 2025-26 में 356 गिद्ध रखे गए और 35 चूजों का सफल प्रजनन हुआ। 87 गिद्धों को पुनर्वास के लिए छोड़ा गया, जबकि 90 गिद्ध दूसरे संरक्षण-प्रजनन संस्थानों में भेजे गए। 22 संस्थानों के 1,222 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण भी दिया गया।
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राव नरबीर सिंह ने केंद्र के कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में ‘स्टोरी ऑफ जटायु’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया और ऑनलाइन ड्राइंग व डिजिटल फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
गिद्ध संरक्षण के लिए जरूरी कदम
कार्यशाला में गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र विकसित करने, सुरक्षित दवाओं के इस्तेमाल, सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने, संरक्षण प्रजनन, वैज्ञानिक जानकारी बढ़ाने, बेहतर नीतियों और जनभागीदारी पर जोर दिया गया।
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