एनआरआई का घर कब्जाने और रिश्वत लेने के आरोप से डीएसपी देशबंधू को बरी कर दिया गया। इस मामले में आरोपी तीन अन्य पुलिस कर्मियों को और एनआरआई की पत्नी को भी कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। मामला 2005 में सीएम फ्लाइंग स्क्वायड की जांच के बाद सेक्टर-5 थाने में एक एनआरआई की शिकायत पर दर्ज हुआ था।
जानकारी के मुताबिक, सेक्टर-6 निवासी नीलम चोपड़ा ने पति अशोक चोपड़ा व अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ रायपुर रानी थाने में किडनैपिंग का मामला दर्ज कराया था। आरोप थे कि जब वह अपने बच्चों के साथ यमुनानगर जा रही थीं, तो रायपुर रानी में उन्हें किडनैप कर लिया गया।
थाने में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने अशोक चोपड़ा व अन्य को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद अशोक चोपड़ा ने एक शिकायत दी कि डीएसपी देशबंधु, एएसआई नरेंद्र, अश्वनी, मांगे राम व नीलम चोपड़ा ने साजिश के तहत उन्हें फंसाया है। क्योंकि उनकी पत्नी के साथ अनबन चल रही थी। इतना ही नहीं डीएसपी व अन्य पुलिस कर्मियों ने उसे अवैध हिरासत में लेकर उसकी सेक्टर-6 स्थित कोठी को जबरदस्ती किसी अन्य के नाम करवा दी है। यह शिकायत सीएम फ्लाइंग स्क्वायड में जांच के लिए आई।
स्क्वायड के एसपी शिव शक्ती राव ने मामले की जांच की। इसके बाद सेक्टर-5 थाने में उक्त के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। बाद में अशोक चोपड़ा व नीलम चोपड़ा के बीच समझौता हो गया और अशोक के खिलाफ किडनैपिंग की एफआईआर खारिज हो गई। वहीं जो मामला अशोक ने दर्ज कराया था, उसके लिए वह कोर्ट में नहीं आया और न ही कोई ऐसे सबूत मिले। लिहाजा कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया।