हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) मधुबन के निदेशक ने सभी जांच अधिकारियों को नशे का सैंपल भेजते हुए इसकी मात्रा एमएल में न भेज कर ग्राम में भेजने का आदेश दिया है। यह जानकारी एफएसएल मधुबन के वरिष्ठ वैज्ञानिक भारत भूषण ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पेश होकर दी। इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन ने जवाब दाखिल करने के लिए मोहलत मांगी जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी।
वर्ष 2019 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस के एक मामले में दिशा-निर्देश जारी कर कहा था कि ऐसे मामलों में लिक्विड नशे की मात्रा को ग्राम में बताया जाए। एनडीपीएस एक्ट में नशे की मात्रा को ग्राम में ही बताने का प्रावधान है। जो नशा लिक्विड पकड़ा जाता है उसे लीटर में ही मापा जाता है जबकि ग्राम में मात्रा पता लगने के बाद ही यह निर्धारित किया जा सकता है कि नशे की मात्रा कामर्शियल है या नहीं।
अक्सर नशे की मात्रा के बारे में जानकारी में देरी के चलते पुलिस तय समय में चालान पेश नहीं कर पाती है और आरोपियों को जमानत मिल जाती है। इस मामले में पंजाब के एडवोकेट जनरल ने कोर्ट में हाजिर होकर बताया कि एफएसएल और ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन के साथ तालमेल बैठाने के लिए तीन सदस्यों वाली समिति का गठन किया गया है। जिन मामलों में हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होगा लॉ अधिकारी उनके बारे में समिति को जानकारी देंगे। इस जानकारी के बाद कमेटी एफएसएल और ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन के साथ मिलकर इसका हल निकालेगी। कमेटी में एडिशनल एडवोकेट जनरल गौरव गर्ग धुरीवाला, सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल एचएस सुल्लर और डिप्टी एडवोकेट जनरल लुविंदर सोफत शामिल हैं।