पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से उस पांच महीने के बच्चे की वर्तमान कस्टडी और कल्याण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसे कथित रूप से उसके नशे के आदी माता-पिता ने 1.8 लाख रुपये में बेच दिया था।
सेवानिवृत्त बाॅक्सिंग कोच और सामाजिक कार्यकर्ता लाभ सिंह ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए पंजाब सरकार को नशा मुक्ति के लिए कठोर और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि मानसा जिले के बरेटा थाने में 25 अक्तूबर को दर्ज एफआईआर में स्पष्ट है कि दंपती ने अपने नशे की जरूरत पूरी करने के लिए ही शिशु को बेच दिया।
याचिका में आग्रह किया गया कि बच्चे को मां की गोद और उसके दूध का अधिकार किसी भी सूरत में छीना न जाए। साथ ही याचिका में बच्चे के माता-पिता के पुनर्वास की व्यवस्था की अपील की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि नारेबाजी, विशेष अभियान और सरकार के दावों के बावजूद, प्रशासन नागरिकों के जीवन और गरिमा के सांविधानिक अधिकार (अनुच्छेद 21) की रक्षा करने में विफल रहा है। राज्य की नाकामी के कारण नशाखोरी और तस्करी का ऐसा माहौल बना जिसमें शिशु को बेचने जैसी घटनाएं होने लगी हैं।
यह मामला प्रदेश में बढ़ते नशे के संकट पर व्यापक न्यायिक जांच का कारण बना है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क पर गंभीर चिंता जताई कि यह घटना कोई इत्तफाक नहीं, बल्कि पंजाब को जकड़ चुकी नशे की महामारी का भयावह उदाहरण है जिसने राज्य के नैतिक, सामाजिक और आर्थिक ढांचे को खोखला कर दिया है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू पर आधारित बेंच ने सरकार से इस मामले में जवाब तलब करते हुए शिशु की कस्टडी व मामले पर स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।