पंचकूला। पंचकूला के विकास और स्मार्ट सिटी के दावों के बीच एक भयावह सच्चाई सांस ले रही है। इंदिरा कॉलोनी के हजार से अधिक लोग वर्षों से ऐसा पानी पीने को मजबूर हैं, जो गंदे नाले के बीच से होकर उनके घरों तक पहुंचता है। इंदिरा कॉलोनी के बीच बहते नाले के ठीक बीच हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन प्रशासनिक संवेदनहीनता की जीती-जागती मिसाल है। नाले में बहती गंदगी, सुअर-कुत्तों और चूहों की मौजूदगी के बीच से गुजरता यही पाइप कॉलोनी के लोगों की प्यास बुझाने का एकमात्र सहारा बना हुआ है। प्राधिकरण ने नाले के भीतर दो इंच की रबर पाइपलाइन डालकर ट्यूबवेल के जरिए कॉलोनी में पानी की सप्लाई की व्यवस्था की है। इसी पाइप से अलग-अलग कनेक्शन दिए गए हैं। सुबह और शाम जब पानी छोड़ा जाता है, तब महिलाएं और बच्चे बहते नाले के बीच खड़े होकर पानी भरते दिखाई देते हैं।
- 12 अक्तूबर 2024 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को गंदे नाले से गुजर रही पाइपलाइन बदलने के लिए ज्ञापन सौंपा गया था। कई बार वह विभाग के अधिकारियों के पास चक्कर लगा चुकी हैं। पाइप लाइन डालने के लिए जगह की पैमाइश भी की गई, लेकिन समस्या का समाधान आजतक नहीं हो पाया। एक सप्ताह के अंदर अगर नया पाइप लाइन डालने के विषय में विचार नहीं किया तो एचएसवीपी के ऑफिस का कॉलोनी के लोग घेराव करेंगे। - पूर्व पार्षद उषा रानी
- नाले के बीच से गुजरती पाइपलाइन से ही कॉलोनी में पानी आता है। सुअर, कुत्ते और चूहों के बीच से भरा गया यही पानी हमारे घरों तक पहुंचता है।- डॉ. राम प्रसाद, स्थानीय निवासी
- पिछले 13 वर्षों से लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। गर्मी के मौसम में बच्चे सबसे ज्यादा बीमार पड़ते हैं। पानी को उबालकर पीना रोजमर्रा की मजबूरी बन चुकी है। एचएसवीपी कार्यालय के अनगिनत चक्कर लगाए गए, लेकिन समाधान आज भी दूर है।- कांति, स्थानीय निवासी