पंचकूला। जिले के 140 से ज्यादा डॉक्टर शुक्रवार को दो घंटे के हड़ताल पर थे। सुबह 9 से 11 बजे तक डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से मरीजों के न तो ओपीडी कार्ड बने और न ही किसी डॉक्टर ने मरीजों की जांच की। इस बीच करीब साढ़े तीन घंटे तक सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में मरीज परेशान होते रहे। सबसे ज्यादा परेशानी गायनी ओपीडी में जांच के लिए पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को हुई।
हड़ताल 11 बजे के खत्म होने के बाद डॉक्टर ओपीडी में मरीजों की जांच के लिए पहुंचे उसके बाद मरीजों के कार्ड बनाने शुरू हुए और जांच की प्रकिया डॉक्टरों ने शुरू की। दरअसल सुबह साढ़ेे से मरीजों का ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर पर तांता लग गया था, सुबह 10 बजे तक पूरा अस्पताल मरीजों से भरा हुआ था। चारों तरफ मरीजों की अस्पताल के बाहर तक लंबी लाइनें लगी हुई थीं। कई मरीज तो हड़ताल सुनकर बिना जांच घर वापस लौट गए। वहीं, कुछ ने निजी अस्पतालों में जांच कराना मुनासिब समझा।
डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से प्रेसिडेंट डॉ. मनदीप सिंह ने बताया कि शुक्रवार को 2 घंटे की पेन डाउन हड़ताल की गई थी। सुबह 11 बजे सभी डॉक्टर अपनी ओपीडी में आ गए थे और उन्होंने काम शुरू कर दिया था। अगर सरकार और विभाग की ओर से उनकी मांगों पर कोई जायज फैसला नहीं लिया गया तो यह हड़ताल आगे भी हो सकती है। इसके बारे में स्टेट बॉडी की ओर से फैसला लिया जाएगा। स्टेट बोर्ड की ओर से अभी बैठक की जानी है। इसके बाद ही आगे की रणनीति के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
पहले ओपीडी कार्ड बनाया, हड़ताल शुरू होते ही काउंटर बंद
शुक्रवार की सुबह नागरिक अस्पताल में जांच के लिए आने वाले मरीजों का ओडीपी कार्ड बनाना शुरू किया गया। जैसे ही डॉक्टर हड़ताल पर बैठ गए, ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर भी बंद कर दिया गया। दो घंटे बाद 11 बजे मरीजों का हड़ताल से डॉक्टरों के उठने के बाद दोबारा ओपीडी कार्ड बनाने के लिए रजिस्ट्रेशन काउंटर खोला गया। इसके बाद मरीजों ने राहत की सांस ली। इस बीच मरीज ओपीडी कार्ड बनवाने के लिए करीब ढाई घंटे तक खड़े रहे। मरीजों की भीड़ बढ़ती गई और अस्पताल के बाहर तक मरीजों की लाइन लग गई। कार्ड बनवाने के लिए कोई व्हील चेयर पर बैठकर इंतजार कर रहा था तो कोई पेड़ों के नीचे बैठ बारी का इंतजार कर रहा था।
सीनियर डॉक्टरों को ओपीडी से उठाया
सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल में सुबह 9:30 बजे तक फील्ड से भी कई डॉक्टर हड़ताल में शामिल होने के लिए पहुंच गए थे। कई डॉक्टर हड़ताल में शामिल होने के लिए नहीं पहुंचे थे, जिसके बाद एक डॉक्टरों की टीम उन्हें ओपीडी से लाने पहुंची और डॉक्टरों को ओपीडी से हड़ताल में शामिल होने के लिए लाया गया।