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पंजाब, हरियाणा में डीएम लगातार दायित्व निभाने में नाकाम: हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। वित्तीय संस्थानों की अर्जी पर रिकवरी के दायित्व को निभाने में पंजाब, हरियाणा दोनों राज्यों के विभिन्न जिलों के डीएम नाकाम बताते हुए लंबित सभी अर्जियों का हाईकोर्ट ने ब्योरा तलब कर लिया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को अगली सुनवाई पर यह ब्योरा सौंपने का आदेश दिया है। इसमें विफल रहने पर उन्हें वीसी के जरिये कोर्ट में मौजूद रहना होगा। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कोटक महिंद्रा बैंक ने एक संपत्ति का कब्जा लेने के लिए अमृतसर के डीसी को निर्देश जारी करने की मांग की थी। 7 जनवरी, 2020 को हाईकोर्ट ने एक माह के भीतर डीसी को अर्जी पर उचित आदेश जारी करने का आदेश दिया था। पालन न होने पर बैंक ने अवमानना याचिका दाखिल की थी। इसके जवाब में डीसी ने बताया कि 18 जनवरी, 2022 को आदेश का पालन करवा कर संपत्ति पर बैंक को कब्जा दिलावा दिया था।
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आदेश के पालन में देरी का कारण पहले कोरोना और फिर पंजाब में विधानसभा चुनाव बताया गया। हाईकोर्ट ने जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि क्या दो साल में वित्तीय संस्थान की किसी अर्जी पर डीएम ने निर्णय नहीं लिया। डीएम गुरप्रीत सिंह खैरा पर हाईकोर्ट ने अवमानना के आरोप तय करते हुए हलफनामा मांग लिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे संज्ञान में आया है कि ज्यादातर मामलों में पंजाब और हरियाणा दोनों राज्याें के डीएम सरफेसी एक्ट में अपना दायित्व निभाने में नाकाम हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इस रवैए के चलते बैंक और अदालत दोनों पर बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव यह बताएं कि संपत्ति के कब्जे को लेकर वित्तीय संस्थानों के कितने आवेदन विचाराधीन हैं और इन्हें कब दाखिल किया गया था।
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