स्वामी विवेकानंद और पंजाब के संबंधों पर डाला प्रकाश
पंजाब विश्वविद्यालय में आयोजित संवाद सत्र के दौरान डॉ. निखिल यादव ने स्वामी विवेकानंद की अविभाजित पंजाब की यात्राओं और श्री गुरु नानक देव जी तथा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रति उनकी श्रद्धा का उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर स्वामी विवेकानंद के विचारों के प्रभाव को भी रेखांकित किया।
इस दौरान उन्होंने शहीद भगत सिंह के वर्ष 1923 में लिखे निबंध ‘पंजाब की भाषा और लिपि की समस्या’ का भी उल्लेख किया। इस निबंध में भगत सिंह ने स्वामी विवेकानंद का संदर्भ दिया है। डॉ. यादव ने इन ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद के विचारों और पंजाब की सामाजिक एवं बौद्धिक परंपरा के बीच संबंधों से अवगत कराया।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद के संदेश को अपने जीवन में अपनाएं और अपनी ऊर्जा का उपयोग समाज सेवा, सकारात्मक बदलाव तथा राष्ट्रनिर्माण के लिए करें। कार्यक्रम में पंजाब विश्वविद्यालय के शोधार्थियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
‘विवेकानंद 125 : परिसर से समुदाय तक’ अभियान के माध्यम से डॉ. निखिल यादव का प्रयास है कि स्वामी विवेकानंद के विचार केवल शैक्षणिक परिसरों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें। पंचकूला और चंडीगढ़ से जुड़ी उनकी अपनी शैक्षणिक यात्रा इस राष्ट्रव्यापी पहल को एक विशेष व्यक्तिगत जुड़ाव भी प्रदान करती है।