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चंडीगढ़: स्वामी विवेकानंद के विचारों को युवाओं तक पहुंचा रहे डॉ. निखिल, पंजाब विश्वविद्यालय में किया संवाद

Sun, 11 Oct 2026 04:45 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

पंजाब विश्वविद्यालय में आयोजित संवाद सत्र के दौरान डॉ. निखिल यादव ने स्वामी विवेकानंद की अविभाजित पंजाब की यात्राओं और श्री गुरु नानक देव जी तथा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रति उनकी श्रद्धा का उल्लेख किया।
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स्वामी विवेकानंद को लेकर संवाद - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पंचकूला के सेक्टर-14 निवासी डॉ. निखिल यादव की राष्ट्रव्यापी पहल ‘विवेकानंद 125 : परिसर से समुदाय तक’ अब पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ पहुंच गई है। इस पहल के तहत शनिवार, 10 अक्टूबर को पंजाब विश्वविद्यालय के गुरु नानक सिख अध्ययन विभाग और बाबा फतेह सिंह अध्ययन मंडल के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्वामी विवेकानंद और चेतना’ विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें डॉ. निखिल यादव ने विद्यार्थियों के साथ स्वामी विवेकानंद के विचारों, उनके दर्शन और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।

डॉ. निखिल यादव लेखक, नीति शोधकर्ता और विवेकानंद केंद्र के उत्तरी क्षेत्र के उपप्रमुख हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पंचकूला के होली चाइल्ड स्कूल और चंडीगढ़ के सेक्टर-19 स्थित मॉडल स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से पीएचडी की उपाधि हासिल की।

पंचकूला उनके निवास स्थान के साथ-साथ उनकी शैक्षणिक यात्रा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में स्वामी विवेकानंद के विचारों को युवाओं तक पहुंचाने के लिए चलाया जा रहा उनका यह अभियान पंचकूला और चंडीगढ़ से उनके जुड़ाव को एक नया आयाम दे रहा है।

आईआईटी मद्रास से हुई थी पहल की शुरुआत‘

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विवेकानंद 125 : परिसर से समुदाय तक’ अभियान की शुरुआत 11 सितंबर 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, चेन्नई से हुई थी। यह पहल स्वामी विवेकानंद की 125वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 11 सितंबर 2026 से 12 जनवरी 2028 तक संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य देश के 50 शैक्षणिक परिसरों और 75 गांवों तक पहुंचकर स्वामी विवेकानंद के विचारों और संदेश को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाना है।

इस अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं में चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रनिर्माण की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों और ग्रामीण समुदायों में संवाद कार्यक्रम आयोजित कर स्वामी विवेकानंद के विचारों को दैनिक जीवन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

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स्वामी विवेकानंद और पंजाब के संबंधों पर डाला प्रकाश
पंजाब विश्वविद्यालय में आयोजित संवाद सत्र के दौरान डॉ. निखिल यादव ने स्वामी विवेकानंद की अविभाजित पंजाब की यात्राओं और श्री गुरु नानक देव जी तथा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रति उनकी श्रद्धा का उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर स्वामी विवेकानंद के विचारों के प्रभाव को भी रेखांकित किया।

इस दौरान उन्होंने शहीद भगत सिंह के वर्ष 1923 में लिखे निबंध ‘पंजाब की भाषा और लिपि की समस्या’ का भी उल्लेख किया। इस निबंध में भगत सिंह ने स्वामी विवेकानंद का संदर्भ दिया है। डॉ. यादव ने इन ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद के विचारों और पंजाब की सामाजिक एवं बौद्धिक परंपरा के बीच संबंधों से अवगत कराया।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद के संदेश को अपने जीवन में अपनाएं और अपनी ऊर्जा का उपयोग समाज सेवा, सकारात्मक बदलाव तथा राष्ट्रनिर्माण के लिए करें। कार्यक्रम में पंजाब विश्वविद्यालय के शोधार्थियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

‘विवेकानंद 125 : परिसर से समुदाय तक’ अभियान के माध्यम से डॉ. निखिल यादव का प्रयास है कि स्वामी विवेकानंद के विचार केवल शैक्षणिक परिसरों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें। पंचकूला और चंडीगढ़ से जुड़ी उनकी अपनी शैक्षणिक यात्रा इस राष्ट्रव्यापी पहल को एक विशेष व्यक्तिगत जुड़ाव भी प्रदान करती है।

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