मोरनी। लगातार हो रही बारिश ने मोरनी इलाके में तबाही मचा दी है। बारिश न सिर्फ फसलों के लिए अभिशाप बनी है बल्कि आम जनजीवन पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है। कई गांवों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि घरों में दरारें आ गई हैं और यहां रहना खतरे से खाली नहीं है। गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने वाले कच्चे रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन रास्तों पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। कीचड़ इतना अधिक हो गया है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
फसलें हुई तबाह
इलाके की मक्का, हरी मिर्च और टमाटर के अलावा धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कुछ गांवों में हालात इतने खराब हैं कि फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। किसान इन फसलों से होने वाली कमाई से ही सालभर अपने परिवार का पालन-पोषण हैं, लेकिन अब उनकी आय का एकमात्र स्रोत ही खत्म हो गया है। किसानों की उम्मीदें अब सरकार से राहत और मुआवजे पर टिकी हैं ताकि अपने जीवन को पटरी पर ला सकें। कुछ मकानों की सामने की बचाव दीवारें ढह चुकी हैं, जिससे मकान गिरने का खतरा मंडरा रहा है।
पहाड़ों में बनी दरारें
पहाड़ों की हालत बेहद गंभीर हो गई है। पहाड़ों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और बारिश के दौरान ये दरारें और भी खतरनाक साबित हो रही हैं। भूडी गांव के पास स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा हर साल खिसकता जा रहा है।
सोमवार को बड़ा हादसा टला, बस स्किट होकर खाई के किनारे जाकर रुकी
सोमवार को एक बड़ा हादसा टल गया। हरियाणा परिवहन निगम की एक बस बारिश के कारण सड़क पर स्किट होकर खाई के किनारे जाकर रुकी। बस में बैठे यात्रियों की जान सांसत में आ गई थी।
घग्गर नदी उफान पर, पुल के ऊपर चार फीट तक बहने लगा पानी
घग्गर नदी पूरे उफान पर है। रविवार रात मूसलाधार बारिश के बाद नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया। जलस्तर इतना बढ़ गया कि छामला गांव के पास बने पुल के ऊपर से करीब 4 फीट तक पानी बहने लगा। जबकि पिछले वर्षों में हुई बारिश के बाद पानी पुल को छू नही सका था, लेकिन इस बार खतरे की सीमा पार हो गई।
लोहे का पुल टूटा
मरोग पंचायत के खरूणीं गांव में बना लोहे का पुल घग्गर के तेज बहाव में टूट गया है। इस वजह से गांवों के लोगों की मुसीबत बढ़ गई है।
प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत पहुंचाने की अपील की है। गांवों में मेडिकल सुविधा, खाद्य सामग्री और सुरक्षित आश्रय की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं।