-एसीबी करनाल की टीम ने पंचकूला सेक्टर-9 से डॉ. विमल को गिरफ्तार किया
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-9 मार्केट स्थित एक रेस्टोरेंट से आयुष्मान भारत योजना के डिप्टी सीईओ को 5 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए करनाल एंटी-करप्शन ब्यूरो ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी को एसीबी शुक्रवार को अदालत में पेश करेगी। पुलिस ने करनाल के किडनी अस्पताल के डॉक्टर की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी से पंचकूला सेक्टर-17 एसीबी थाना में पूछताछ शुरू की गई है।
आरोपी का नाम डॉ. रवि विमल है, जो कि हरियाणा आयुष्मान विभाग के डिप्टी सीईओ के पद पर कार्यरत हैं। हालांकि इस मामले में फिलहाल पंचकूला एसीबी थाना के एक भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। पुलिस ने रिश्वत की राशि को कब्जे में लेकर उसके सैंपल लैब में जांच के लिए भेज दिए हैं। जानकारी के मुताबिक रिश्वत की रकम में सभी नोट 500 के थे।
व्हाट्सएप चैट को लिया कब्जे में.............
एसीबी की टीम ने शिकायतकर्ता की शिकायत और व्हाट्सएप चैट को सबसे पहले अपने कब्जे में ले लिया है। रिश्वत के सिलसिले में फोन पर हुई बात की रिकॉर्डिंग भी एसीबी की टीम ने अपने कब्जे में ली है। शिकायतकर्ता ने रिश्वत की रकम देने के लिए डिप्टी सीईओ को सेक्टर 9 की मार्केट स्थित एक रेस्टोरेंट में दोपहर के समय बुलाया था। दूसरी तरफ विजिलेंस की टीम को सूचना दे गई थी। इसलिए विजिलेंस की टीम सादे लिबास में रेस्टोरेंट के बाहर खड़ी थी। जैसे ही शिकायतकर्ता ने रेस्टोरेंट के भीतर डिप्टी सीईओ को रिश्वत का पैसा दिया, बाहर खड़ी विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान उसका हाथ पानी से धुलवाकर सबूत को पक्का किया गया और कार्रवाई की वीडियो भी बनाया गया।
10 लाख मांगे, 5 लाख में डील पक्की हुई.......
करनाल के मूलचंद किडनी अस्पताल के मालिक डॉक्टर संदीप चौधरी ने एसीबी को दी शिकायत में बताया कि उनका अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के इंपैनलमेंट लिस्ट में शामिल है। यहां आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का मुफ्त इलाज किया जाता है और बदले में सरकार उन्हें इलाज के खर्च का पैसे देती है।
1 अगस्त 2024 को अस्पताल के ऑफिशियल ई-मेल पर आयुष्मान भारत योजना की इंपैनलमेंट लिस्ट से अस्पताल का नाम सस्पेंड या हटाए जाने की जानकारी आयुष्मान भारत योजना विभाग की ओर से भेजी गई थी। उसका कारण विभाग की ओर से भेजे गए नोटिस का जवाब नहीं दिया जाना बताया गया था।
उसके बाद उसी ई-मेल के जवाब में शिकायतकर्ता ने पिछले कुछ समय में एक भी नोटिस नहीं मिलने की जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया कि पिछले कुछ समय में आई ई-मेल्स का जवाब उन्होंने दिया था। जिसके बाद आयुष्मान भारत योजना की ओर से उसके लिए 3,71,500 रुपए की पेनाल्टी जमा करने को कहा।
इसके बाद शिकायतकर्ता पंचकूला आकर आयुष्मान भारत योजना के अधिकारी (आईएएस) से मिले और उनके सामने बात रखी। उन्होंने डिप्टी सीईओ डॉ. रवि विमल को शिकायतकर्ता के अस्पताल का नाम सस्पेंशन लिस्ट से हटाकर इंपैनलमेंट लिस्ट में दोबारा डालने को कहा। डॉ. रवि विमल ने दबाव बनाकर शिकायतकर्ता से पेनाल्टी की राशि भरवाई लेकिन सस्पेंशन नहीं हटाया।
18 सितंबर को जब शिकायतकर्ता सस्पेंशन हटाने के लिए डॉ. विमल से मिले तो उन्होंने कहा कि इसके लिए 10 लाख रुपये लगेंगे। यह सुन शिकायतकर्ता घबरा गया और उसने रिश्वत की रकम ज्यादा होने की बात कह। इस पर डॉ. विमल ने कहा कि पैसे बड़े अधिकारियों व उनके नजदीकी कर्मचारियों को भी देने होते हैं। उसके बाद डील 10 लाख के बजाय 5 लाख रुपये में पक्की हुुई। जिसके बाद शिकायतकर्ता ने मामले की शिकायत करनाल एसीबी को दी।