पंचकूला। प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने शुक्रवार को सेक्टर-6 स्थित सामान्य अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में कई तरह की खामियां मिलीं, जिस पर उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अब पंचकूला डेंगू के मामलों में भी पूरे हरियाणा में नंबर एक पहुंच गया है। जिले में डेंगू के केसों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने पंचकूला के स्वास्थ्य विभाग व निगम प्रशासन के नकारापन की जानकारी स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को पत्र भेजकर दी है।
उनका कहना है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार पंचकूला में 380 के करीब डेंगू के मरीज हैं, जबकि यह आंकड़ा 750 के पार है। सरकारी अस्पतालों में तो डेंगू की टेस्टिंग ही नहीं हो रही। जो हो भी रही है उसकी रिपोर्ट भी तीन से चार दिन के बाद मरीजों को मिल रही है। रोजाना 20 से ज्यादा डेंगू के मामले आना बेहद चिंता का विषय है। अस्पताल में सुविधाएं न मिलने से वह मजबूर होकर प्राइवेट अस्पतालों में जाकर इलाज करवा रहे हैं। इस दौरान उनके साथ पूर्व चेयरमैन एडवोकेट विजय बंसल, शशि शर्मा, धनेंद्र आहलूवालिया, आरके कक्कड़, पूर्व पार्षद नरेश रावल, पार्षद सलीम दबकौरी, एडवोकेट नवीन बंसल, पार्षद संदीप सोही, पार्षद पंकज, पार्षद उषा रानी, डॉ. रामप्रसाद, पार्षद अक्षयदीप, ओम शुक्ला, दीपांशु बंसल, सुषमा खन्ना, संदीप जलौली, विजय सैनी, अमन दत्त शर्मा, एलआर बिश्नोई, विनोद, अनवर हुसैन मौजूद थे।
फॉगिंग न होने हालात हुए खराब
चंद्रमोहन ने कहा है कि निगम के पास पहले से ही 29 फॉगिंग मशीनें थीं। शहर के किसी भी सेक्टर में फॉगिंग नहीं करवाई गई। जब हालात बेकाबू हुए तो 11 मशीनें और खरीदी गईं। निगम को फॉगिंग से संबंधित तैयारी पहले करनी चाहिए थी। भाजपा नेता केवल फोटो खिंचवाने तक सीमित हैं। चंद्रमोहन ने बताया कि जिस डेंगू पीड़ित मरीज की प्लेटलेट्स कम होने से हालत खराब होती है, उसके लिए सिंगल डोनर प्लेटलेट्स प्रोसीजर होता है, जिसकी किट साढ़े आठ हजार रुपये की अस्पताल में मिलती है। आलम यह है कि जिले में इस किट की शॉर्टेज है और जो है भी उन्हें पिक एंड चूज करके प्रभावशाली लोगों के दबाव में दिया जा रहा है।
लारवा मिलने के बाद विभाग ने दिए थे 1500 नोटिस
नगर निगम प्रशासन और विधानसभा स्पीकर को आड़े हाथों लेकर चंद्रमोहन ने कहा कि जब स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू का लारवा मिलने के बाद 1500 से ज्यादा नोटिस जिले में दिए थे। तब निगम ने ध्यान नहीं दिया। एक भी जगह चालान नहीं किया। इस कारण डेंगू के मामले बढ़े। हेल्थ डिपार्टमेंट और निगम प्रशासन के पास मैनपावर की भारी कमी है। इसके साथ ही डेंगू की रोकथाम के लिए जहां मलेरिया विभाग के कर्मियों को डेंगू रोकने के लिए काम करना था, उन्हें कोविड वैक्सीनेशन में लगाया हुआ है। इसके लिए अतिरिक्त स्टाफ रखा जा सकता था। डेंगू के केस कंफर्म होने के बाद 400 मीटर एरिया में 50 घरों के अंदर फॉगिंग जरूरी भी होती है लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।
एक बेड पर दो-दो मरीज
पंचकूला सेक्टर-6 के सिविल अस्पताल में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। इसके चलते बेड की कमी हो गई है। आलम यह है कि यहां इमरजेंसी और डेंगू वार्ड में एक बेड पर दो-दो मरीजों को उपचार के लिए लिटाया गया है। इसके चलते मरीजों को परेशान हो रही है। अस्पताल में अब तक 4900 मरीजों के डेंगू टेस्ट किए जा चुके हैं। इसमें पंचकूला, बलटाना, पीरमुछल्ला, ढकोली, मनीमजारा तक के मरीज शामिल हैं।
डेंगू पर काबू पाने में सरकार बुरी तरह फेल: भारद्वाज
पंचकूला। प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुधा भारद्वाज ने प्रदेश सरकार पर डेंगू पर नियंत्रण करने में बुरी तरह से फेल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में डेंगू तेजी से फैल रहा है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री पाकिस्तान और विदेशी मामलों पर ट्वीट करने में व्यस्त हैं। सुधा भारद्वाज ने कहा कि मनोहर सरकार ने जिस तरह से कोरोना के सही आंकड़े छिपाकर प्रदेश को गुमराह किया है उसी तरह से डेंगू के सही आंकड़े, अब तक हुई मौतों की जानकारी छिपाई जा रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री देश-विदेश की घटनाओं पर तो ट्वीट करते समय देर नहीं लगाते, लेकिन उनके अपने ही विभागों में क्या चल रहा है इसकी जानकारी नहीं है। हरियाणा में आज कोई भी घर ऐसा नहीं है जहां डेंगू, मलेरिया व हैजा के रोगी न हों।
19 अक्तूबर तक के डेंगू के रिकार्ड
पंचकूला से 331
सिरसा से 275
फतेहाबाद 206
सोनीपत से 192
गुरुग्राम से 184
फरीदाबाद 173