चंडीगढ़। पंजाब एजी कार्यालय में कानून अधिकारियों की नियुक्ति में महिला वकीलों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
एडवोकेट सुनैना ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब सरकार ने एजी कार्यालय में कानून अधिकारियों की नियुक्ति में एससी उम्मीदवारों को 25 प्रतशित आरक्षण प्रदान किया है, लेकिन महिला वकीलों को 2020 नियमों के अनुसार 33 प्रतिशत पदों का आरक्षण नहीं दिया है जो भेदभावपूर्ण है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की एकल पीठ के समक्ष तर्क दिया कि एक बार जब आरक्षण किसी एक श्रेणी या वर्ग के लिए दिया जाता है, तो इसे किसी अन्य वर्ग या श्रेणी को देने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
पंजाब सरकार ने 24 नवंबर को एजी कार्यालय में सहायक महाधिवक्ता से लेकर अतिरिक्त महाधिवक्ता तक विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन दिया था। 58 पद एससी वर्ग के अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित थे। इसके अलावा किसी अन्य के लिए भर्ती में कोई आरक्षण नहीं रखा गया। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि एससी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण पंजाब अनुसूचित जाति और सेवाओं में पिछड़ा वर्ग आरक्षण अधिनियम 2006 के तहत दिया गया है। यह कानून पंजाब राज्य के अंतर्गत विभिन्न प्रतिष्ठानों में अनुसूचित जाति श्रेणी और पिछड़ा वर्ग श्रेणी के सदस्यों के लिए आरक्षण प्रदान करता है।
पंजाब सिविल सेवा महिलाओं के लिए पदों का आरक्षण नियम 2020 के तहत देना जरूरी था, लेकिन यह विज्ञापन इस नियम के खिलाफ है। इससे पहले शारीरिक अक्षम कोटे में चार प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा चुकी है, जिसमें हाईकोर्ट पहले ही पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर चुका है।