चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतसर से ग्रीन फील्ड कनेक्टिविटी सहित दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस वे परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका पर एनएचएआई को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न भूमि अधिग्रहण पर रोक लगा दी जाए। हाईकोर्ट के इस आदेश से एक्सप्रेस वे के निर्माण पर संकट की स्थिति पैदा हो गई है।
लुधियाना वेस्ट के पांच गांवों के निवासियों ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया था कि परियोजना के लिए उनका मकान व अन्य निर्माण बिना किसी मुआवजे के तोड़ा जा रहा है। इस परियोजना के लिए उनके गांव की भूमि का 30 किलोमीटर मार्ग के लिए अधिग्रहण किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान एनएचएआई हाईकोर्ट को बता चुका है कि जहां तक मकानों का संबंध है, केवल एक घर इस मार्ग के तहत आ रहा है।
हाईकोर्ट को बताया गया कि कुछ इमारतों, नलकूप, बोरवेल आदि के बारे में कोर्ट में जो सूची दी गई कुछ याचिकाकर्ताओं ने तो उनके बारे में मुआवजे का दावा भी नहीं किया है। जिन लोगों ने दावा किया था उनको जून/अगस्त 2022 में अवार्ड जारी कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि न तो उन्हें मुआवजा पास होने की जानकारी है न ही मुआवजा राशि उन्हें मिली है। याची ने कहा कि बिना उचित मुआवजा तय किए उनकी भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है ऐसे में इस पर तुरंत रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने तुरंत अधिग्रहण पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। हालांकि एनएचएआई को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाए। एनएचएआई को 10 जुलाई तक इस बारे में जवाब दाखिल करना होगा।