नोट: दिन व रात की और अविनाश के ट्रैक से आई तस्वीरों का इस्तेमाल करें।
यूनिफार्म न पहचान... ऑटो का सफर यानी ‘आफत में जान’
सबहेड
महिला रिपोर्टर के साथ अमर उजाला टीम ने दिन और रात के समय ऑटो के सफर में महिलाओं की सुरक्षा का लिया जायजा
ऑटो चालक बोला - चंडीगढ़ में दिन में ही कानून का डर है, रात को कोई नहीं पूछता’
पुलिसकर्मी रहे नदारद, दो एमवीआई भी कहां-कहां होंगे खड़े, तीन की जगह पांच सवारियां तक बैठाते हैं, पहचान भी सही नहीं बताते
अमर उजाला टीम
चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल में महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट व जिला अदालत की तल्ख टिप्पणी और चिंता के बावजूद सिस्टम नींद में है। यूटी प्रशासन और पुलिस महिलाओं की सुरक्षा के चाहे जितने दावे करे पर सच्चाई इससे कोसों दूर है। अमर उजाला टीम ने ऑटो में सफर करने वाली महिलाओं की सुरक्षा का जायजा लेने और प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस की सक्रियता जानने के लिए वीरवार को दिन और रात दोनों समय ऑटो का सफर कर रियलिटी चेक किया। दिन के समय पांच मुख्य रूट और रात के समय एक रूट को चुना गया। रात के समय ऑटो चालक न केवल मनमाना किराया लेते दिखे, बल्कि यातायात नियमों से भी बेपरवाह नजर आए। महिला रिपोर्टर ने दिन व रात के समय ऑटो का सफर किया। इस दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ऑटो में मीटर के हिसाब से किराया नहीं लिया गया। चालक यूनिफार्म में नहीं थे। इतना ही नहीं उनकी नेम प्लेट भी गायब थी। ऑटो में चालकों के पहचान पत्र भी नहीं लगे मिले। अग्निश्मन यंत्र तो दूर की बात है। वहीं, पुलिस की सक्रियता भी नजर नहीं आई। किसी भी रूट पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी ऑटो को रोककर चेकिंग करते नजर नहीं आए। केवल दोपहिया वाहन और कार चालकों की चेकिंग और वाहनों को टो करते नजर आए। पीसीआर कर्मी भी नदारद दिखे।
आज ही नहीं पहनी है यूनिफार्म
रिपोर्टर पीजीआई चौक से ऑटो नंबर (सीएच01टीबी-5747) से हाउसिंग बोर्ड जाने को सवार हुई। ऑटो में पहले से ही चार लोग सवार थे। ऑटो का मीटर ऑन नहीं मिला। चालक की अधूरी यूनिफार्म से उसकी नेम प्लेट गायब थी। पूछने पर उसने अपना नाम अनिल कुमार बताते हुए कहा कि शहर में कोई भी मीटर नहीं चलाता और लोग मीटर के हिसाब से किराया भी नहीं देते। ऑटो में चार सवारियों से अधिक बैठाने पर चालक ने कहा कि तीन से अधिक सवारियां बैठाने की अनुमति नहीं है लेकिन तीन सवारियों में बचता कुछ नहीं है। यूनिफार्म बारे उसने कहा कि ‘आज ही नहीं पहनी, वैसे रोजाना प्रापर ड्रेस में रहता हूं’।
ऑटो में नहीं था चालक का पहचान पत्र
रिपोर्टर हाउसिंग बोर्ड से रेलवे स्टेशन जाने को ऑटो नंबर (पीबी65एटी-4140) में सवार हुई। ऑटो से मीटर गायब मिला। चालक यूनिफार्म पहने और नेम प्लेट लगाए हुए जरूर मिला लेकिन ऑटो में उसका पहचान पत्र नहीं लगा था। पूछने पर उसने अपनी पहचान सुधीर चौधरी के रूप में बताई। कहा कि उसने एक महीने पहले ही ऑटो खरीदा है। उसने कहा कि शहर में बहुत वारदातें होती हैं। एक की गलती से हर चालक बदनाम हो जसता है। इस कारण सरकार ने ऑटो में मीटर लगाने बंद कर दिए हैं। हाउसिंग बोर्ड से रेलवे स्टेशन तक का किराया तीस रुपये लिया गया और कुछ चालक साठ रुपये मांगते दिखे।
रास्ते भर फोन पर बात करता रहा ऑटो ड्राइवर
रिपोर्टर ऑटो ऑटो नंबर (पीबी65जेड-7223) में रेलवे स्टेशन से सेक्टर-17 के लिए सवार हुई। ऑटो में न मीटर लगा मिला, न ड्राइवर का पहचान पत्र ऑटो में चस्पा मिला और उसने यूनिफार्म भी नहीं पहनी थी। पूछने पर पहचान निकुल कुमार बताई। वह ड्राइविंग करते हुए मोबाइल पर बात करता रहा। ऑटो चालक सवारियों को गुमराह करने के लिए उन्हें वहां बस नहीं आने की बात कहते दिखे। सवारियों से मनमर्जी से पैसे वसूलते गए। ऑटो चालकों ने यूनिफार्म को ऑटो में पीछे रखा था, ताकि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर दिखने पर उसे पहन लिया जाए।
तीन की अनुमति, बैठाते हैं पांच सवारियां
रिपोर्टर ऑटो नंबर (पीबी65एडी-8886) में सेक्टर-17 से सेक्टर-43 जाने को सवार हुई। ऑटो चालक को बिना यूनिफार्म और बिना नेम प्लेट के पाया। मीटर भी बंद मिला और चालक का पहचान पत्र भी गायब था। ऑटो में अग्निश्मन यंत्र लगा नहीं मिला। पूछने पर चालक ने उसकी पहचान जतिंदर सिंह के रूप में बताई। उसने कहा कि वह ऑटो में कम से कम पांच सवारियां बैठाता है।
सड़क पर चल रही युवतियों पर कमेंट कर रहा था ऑटो चालक
ऑटो नंबर (पीबी65एनपी-7713) में सवार होकर सेक्टर-43 से रोज गार्डन जाया गया। यहां भी ऑटो चालक ने यूनिफार्म नहीं पहनी थी और न ही ऑटो में मीटर लगा मिला। चालक का पहचान पत्र भी ऑटो में नहीं लगा मिला। चालक ने अपनी पहचान सोनू वर्मा के रूप में बताई। एक समय रिपोर्टर ऑटो में अकेली रह गई। उस दौरान चालक सोनू ने ड्राइविंग करते हुए सड़क पर जाती युवतियों को अभद्र कमेंट किए।
पुलिस की लापरवाही से ऑटो चालक बेखौफ
कुछ एनजीओ के संचालक समेत सेक्टर-27, 19 और अन्य विभिन्न सेक्टरों के लोगों ने बताया कि यूटी पुलिस पूरे वर्ष में गाहे-बेगाहे ही ऑटो चालकों की वेरिफिकेशन को स्पेशल ड्राइव चलाती है लेकिन पुलिस के रूटीन चेकिंग नहीं करने से ऑटो चालक नियम-कानून की परवाह नहीं करते। पुलिस और एसटीए के रूटीन में संयुक्त रूप से काम नहीं करने से ऑटो चालक यातायात नियमों से बेपरवाह हैं।
दो एमवीआई के भरोसे है 5500 रजिस्टर्ड ऑटो
शहर में करीब 5500 ऑटो रजिस्टर्ड हैं लेकिन 5500 चालकों पर चेकिंग के लिए महज दो मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर हैं। ऑटो चालकों को इन एमवीआई की पहचान भी है। यही कारण है कि ऑटो चालक एमवीआई को सड़क पर खड़ा देख यू-टर्न लेकर रफू-चक्कर हो जाते हैं लेकिन महज दो एमवीआई और स्टाफ की कमी से यातायात नियमों व मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन कर रहे ऑटो चालकों को पकड़ना मुश्किल है। शहरवासियों व कुछ एनजीओ के संचालकों ने कहा कि यदि ट्रैफिक पुलिस ऑटो चालकों पर रूटीन में कार्रवाई करे तो चंद दिन में ही मजबूत व्यवस्था बन सकती है। इस संबंध में एसएसपी ट्रैफिक शशांक आनंद और डीजीपी संजय बेनिवाल के सरकारी नंबरों पर कई कॉल किए लेकिन उनका जवाब नहीं मिला। उनके मोबाइल नंबर पर संदेश भेजे गए लेकिन उनके उत्तर नहीं मिले।
ऑटो चालक ने बताई गलत पहचान, पुलिस आई तो उगला सच
रात के समय रिपोर्टर सेक्टर-42 की सड़क से एक ऑटो नंबर (सीएच01टीबी-7553) में सवार हुई। न तो मीटर लगा मिला, न ही चालक यूनिफार्म पहने था। सफर पूरा करने के बाद रिपोर्टर ने ऑटो से उतरते समय चालक का पहचान पत्र न दिखने पर उससे उसकी पहचान और यातायात नियमों की पालन नहीं करने का कारण पूछा। चालक ने पहचान सोनू के रूप में बताते हुए कहा कि ‘चंडीगढ़ में दिन में ही कानून का डर है, रात को कोई नहीं पूछता’। फिर कुछ देर बाद वह बदसलूकी करने लगा। सूचना पर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंच आरोपी ऑटो चालक पर कार्रवाई की। पुलिस ने आरोपी ऑटो चालक का चालान किया तो उसने पुलिस को उसकी असली पहचान बुड़ैल निवासी पंकज के रूप में बताई लेकिन सफर के दौरान सवारी को उसने अपनी गलत पहचान बताकर गुमराह किया।
ऑटो चालक टैम्परेरी नंबर पर ढो रहे सवारी
शहर में ऐसे बहुत ऑटो हैं, जो पंजीकरण की निर्धारित समयावधि पूरी होने के बावजूद रजिस्टर्ड नहीं करवाए गए हैं। बावजूद इसके ऐसे ऑटो सड़कों पर महीनों-सालों तक बेरोकटोक दौड़ते हैं। लेकिन न तो ट्रैफिक पुलिस उन्हें इम्पाउंड करती है और न ही वे एसटीए के हाथ आते हैं।
ढिल्लों लाइट प्वाइंट पर डीजल ऑटो स्टैंड
मनीमाजरा के ढिल्लों बैरियर पर पिंजौर और पुराना पंचकूला से आने वाले डीजल ऑटो अवैध तरीके से न केवल खड़े होते हैं। बल्कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड चौक से सवारियां तक आते-ले जाते हैं।
शहर के एक सौ से अधिक डार्क प्वाइंट्स हैं खतरा
यूटी पुलिस विभाग ने इंजीनियरिंग विभाग को शहर के करीब सवा सौ से अधिक अंधेरी जगहों (डार्क स्पॉट) आइडेंटिफाई कर रिपोर्ट भेजी है। स्ट्रीट लाइट्स लगाने को भी लिखा है। बावजूद इसके अधिकांश प्वाइंट्स पर सालों से अंधेरा नहीं छंटा है।
कोट:
यातायात नियमों की अवहेलना करने वाले ऑटो चालकों पर कार्रवाई के लिए पुलिस के सहयोग की आवश्यकता है। यदि संयुक्त प्रयास से ड्राइव चलाई जाए तो चंद दिन में ही व्यवस्था मजबूत हो सकेगी।
राजीव तिवारी, एडिशनल सेक्रेट्री, एसटीए।