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पीरमुछल्ला जीरकपुर

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मकानों के नक्शे पास करवाकर बनाए जा रहे थे फ्लैट
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जीरकपुर में नगर परिषद के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा गोरखधंधा
-इलाके में दर्जनों अन्य प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं अवैध
-दरारें छुुपाने के लिए कॉलोनाइजर ने मिट्टी की सपोर्ट दी
हरजीत सिंह
जीरकपुर।
जीरकपुर के पीरमुछल्ला की इंपीरियल गार्डन कॉलोनी में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत जमींदोज होने के मामले में नगर परिषद के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। अधिकारियों की मिलीभगत से कॉलोनाइजर ने घरों के नक्शे पास करवाकर फ्लैटों का निर्माण कर शुरू दिया, जबकि नियम के मुताबिक फ्लैट का निर्माण हाउसिंग स्कीम के तहत ही किया जा सकता है। हैरानीजनक है कि विशेष कारणों से अधिकारी ने छूट दे रखी थी, जिस कारण कॉलोनाइजर ने लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए अलग-अलग नामों से नक्शे पास करवाए व यहां पर फ्लोर बनाकर बेच रहा था।
कॉलोनाइजर ने साढ़े आठ एकड़ जमीन को अवैध कालोनी पॉलिसी के तहत पास करवाया और यहां पर अलग-अलग नामों से नक्शे पास करवा कर तीन मंजिला फ्लैट बनाना शुरू दिया। नियम के मुताबिक फ्लैटों का निर्माण हाउसिंग स्कीम के तहत ही किया जा सकता था। इसके लिए बनती फीस देने के अलावा निर्माण करने के लिए भी सख्त नियम है, लेकिन कॉलोनाइजर ने नगर परिषद के अधिकारियों की मिलीभगत से पहले अवैध कॉलोनी में इसको पास करवाया। जहां वह नियम के मुताबिक प्लाट बेच सकता था, लेकिन उसकी ओर से यहां पर फ्लैट बना दिए। नियमों को बड़ी चालाकी से प्रयोग में लाया गया क्योंकि नगर परिषद की ओर से किसी भी प्रापर्टी मालिक को घर बनाने के लिए तीन मंजिला की ही मंजूरी दी सकती है।
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तीन मंजिला के ऊपर बनाने के लिए नगर परिषद सिर्फ हाउसिंग स्कीम के तहत ही मंजूरी दे सकता है। कॉलोनाइजर ने बड़ी चालाकी से अकेले नक्शे पास करवा उन पर फ्लैट बना दिए और ग्राउंड फ्लोर पर वाहनों के खड़े होने के पार्किंग बना दी।
जीरकपुर में यह अकेला ऐसा प्रोजेक्ट नहीं है, जहां पर नियमों को ताक पर रखकर तीन मंजिला फ्लैट बनाए गए हैं बल्कि ऐसे शहर में दर्जनों प्रोजेक्ट हैं, जहां नगर परिषद के अधिकारियों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा चल रहा है। इसे देखने वाला यहां पर कोई नहीं है। हालांकि, अकेले व्यक्ति की ओर से पास करवाई गई तीन मंजिला इमारत दूसरे के घर से अलग बनाता है, लेकिन यहां पर फ्लैटों की शक्ल देने के लिए सबका निर्माण भी इकट्ठा किया ताकि ग्राहकों को फ्लैटों के रेट से बेचा जा सके।
ऐसे कॉलोनाइजरों की ओर से फ्लैटों से कीमत कम रखी जाती है। लोग सस्ते घर लेने के चक्कर में ऐसे लोगों के जाल में फंस जाते हैं, जबकि बहुमंजिला इमारतों में नियमों की पूरी पालना करनी पड़ती है, जिसमें बिल्डरों के काफी पैसे खर्च होते है। ऐसे कॉलोनाइजरों की ओर से अधिकारियों की मिलीभगत के चलते घरों के नक्शे पास करवा तीन मंजिला फ्लैट बनाकर जहां ग्राहकों को ठगा जाता है, वहीं सरकार को चूना लगाया जाता है। इसमें फायदा या तो निर्माण करने वाले को मिलता है या इसकी मंजूरी देने वाले नगर परिषद के अधिकारियों को मिलता है।
हालांकि, पुलिस की ओर से वीरवार को तत्कालीन नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सहित अन्य के अधिकारियों पर केस दर्ज किया गया है, लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने दस कॉलोनाइजरों के खिलाफ भी केस दर्ज किया है, जो अभी भी फरार हैं। इसके अलावा पुलिस ने ढकोली क्षेत्र के अकाली पार्षद अजैब सिंह पर इस जगह अवैध माइनिंग करने के आरोप में केस दर्ज किया है।
कॉलोनाइजर अन्य इमारतों पर गिराता रहा मिट्टी
पीर मुछल्ला में इमारत गिरने के मामले में प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की बड़ी लापरवाही दिख रही है। एक ओर जहां पुलिस की ओर से दस कालोनाइजरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वहीं, आने वाले खतरे को देखते हुए कॉलोनाइजर आज भी निर्माणाधीन अन्य ब्लाक की दीवारों को सपोर्ट देने के लिए खुलेआम मिट्टी डालते दिखाई दिए। हालांकि, यह कार्य कॉलोनाइजरों के इशारे पर ठेकेदार कर रहे थे, लेकिन उनको निर्देश कॉलोनाइजर दे रहे थे।
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नगर परिषद के अधिकारियों ने साधी चुप्पी
नगर परिषद के एमई गुरप्रताप सिंह ने कहा कि शुक्रवार से वह मौके पर राहत कार्य में जुटे हैं, जबकि यह रिकार्ड पुराना है। जिससे उनको भी रिकार्ड की जांच में समय लगेगा। इसके बाद ही कुछ कहा सकता है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि यहां पर अकेले मकानों के नक्शे पास हैं।
कैप्शन-
ढकोली में बनाए गए फ्लैटों के पास मिट्टी डाली जा रही। अमर उजाला
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