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एक साल 5 महीने बाद भी नहीं बदली नाम चर्चा घर की सूरत

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नाम के रह गए पंचकूला शहर के नाम चर्चा घर
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- 17 माह बाद भी नहीं लौटी नामचर्चा घर में रौनक
- पंचकूला के दोनों नामचर्चा घर के गेट पर पुलिस के दो-दो जवान और होमगार्ड तैनात रहें

अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। 25 अगस्त 2017 के दंगे के बाद भले ही शहर की सूरत बदल गई है, लेकिन पंचकूला के सेक्टर-15 और 23 में बने नामचर्चा घर में अभी भी सन्नाटा पसरा है। यहां बहुत ही कम लोगों का आना-जाना होता है। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में दोषी डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाने के दौरान शहर में जहां चप्पे-चप्पे पर सेना और पुलिस की टुकड़ियां तैनात नजर आईं। वहीं, दोनों नामचर्चा घर के गेट पर पुलिस के दो-दो जवान और होमगार्ड तैनात दिखे। लेकिन, पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए सुरक्षा के दावे केवल आदेश तक ही सीमित नजर आए। सेक्टर-15 स्थित नाम चर्चा घर के पास खड़े पुलिस कर्मियों से पूछे जाने पर गेट बंद होने का दावा किया गया, लेकिन गेट के पास जाकर देखा गया तो नामचर्चा घर का मुख्य दरवाजा खुला मिला। जिससे साफ है कि 2017 में हुए दंगे के बाद भी पुलिस ने शहरवासियों की सुरक्षा राम भरोसे छोड़ दी।

रोज की जाती है सिमरन भवन की सफाई
बता दें कि 11 जनवरी को डेरा प्रमुख राम रहीम को दोषी करार देने के बाद नामचर्चा घरों को बंद करवा दिया गया था। तभी से नामचर्चा घर में सत्संग करने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद भी रोजाना नाम चर्चा घर में सफाई की जाती है। अभी भी राम रहीम की फिल्म के पोस्टर से नाम चर्चा घर सजे हैं।
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सजा के इंतजार में टीवी पर टिकी रही निगाहें
राम रहीम की सजा का जितना रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल के परिवार को इंतजार था। उससे कहीं ज्यादा शहरवासियों को था। शहरवासी पूरा दिन घरों और दफ्तरों में टीवी पर नजरें गढ़ाए रहे। वे फैसले को लेकर काफी उत्सुक दिखाई दिए।

सरकारी दफ्तरों की बदली काया पर आम जनता को नहीं मिली माया
25 अगस्त 2017 की हिंसा के दौरान डेरा प्रमुख अनुयायियों द्वारा सिटी के सरकारी कार्यालयों और सेक्टर-4 में रह रहे लोगों के घरों को काफी नुकसान पहुंचाया गया था। नतीजतन एक साल पांच महीने बाद सरकारी दफ्तरों की रिपेयरिंग तो करवा दी गई, लेकिन अभी भी शहर वासियों को उनके अधजले वाहनों का मुआवजा नहीं मिल पाया। जिसका जीता जागता सबूत है चंडीमंदिर थाने के बाहर पड़े कंडम वाहन। बता दें कि दंगे के दौरान सेक्टर-4 और सेक्टर-16 स्थित अग्रवाल भवन, होटल पल्लवी और एचडीएफसी बैंक को भारी क्षति पहुंचाई गई थी। जिसके लिए सरकार की ओर से उन्हें अभी तक किसी प्रकार का कोई मुआवजा नहीं मिल पाया। सभी को रिपेयरिंग खुद ही करवानी पड़ी।

17 महीने पहले चली गोलियों की गूंज अभी भी याद है
सेक्टर-4 निवासी मिसेज पूरी ने बताया कि 17 महीने पहले हुए दंगे के दौरान चली गोलियों की गूंज अभी भी उन्हें बहुत अच्छे से याद हैं। गोली चलने से एक व्यक्ति ने तो मेरे घर के गार्डन में ही दम तोड़ दिया। वह डर के मारे अपने पूरे परिवार को लेकर सेक्टर-20 पंचकूला में अपने रिश्तेदारों के घर चली गई थी। इस दौरान हमारे चौकीदार ने बताया कि पुलिस द्वारा किए लाठीचार्ज से बचने के लिए डेराप्रमुख भक्त गेट से चढ़कर अंदर आ गए थे। इस दौरान हमारी गाड़ी और पड़ोसियों की गाड़ी को पुलिसकर्मियों ने ही तोड़ दिया। इसके अलावा हमारे घर के बाहर की बाउंड्री भी टूट चुकी थी। जिसकी रिपेयरिंग सेक्टर-चार निवासियों को खुद ही करनी पड़ी। उस समय प्रशासन ने पूरा ध्यान सेक्टर-दो की सेफ्टी पर दिया। सेक्टर-चार की सेफ्टी की बात आई तो पुलिस भी पीछे हटती नजर आई। बहुत से अनुयायी अपना पर्स तक घरों के बाहर भूल गए थे। जिसे बाद में निगम का कूड़ा उठाने वाले कर्मी ही उठाते दिखे।
वहीं सेक्टर-2 निवासी सुरेश ने बताया कि दंगे के समय वे हिमाचल में गए थे इस दौरान वे अपने परिवार से फोन पर संपर्क में रहे। वह समय उनके लिए उनकी जिंदगी की सबसे कठिन घड़ी थी।
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खाली कराने पड़े थे हॉस्टल
सेक्टर-एक कॉलेज के ब्वॉयज हास्टल वार्डन सुच्चा सिंह ने बताया कि दंगे के समय हमें ब्वॉयज हास्टल खाली करवाना पड़ा और सारे हास्टलर्स को घर भेजना पड़ा था ताकि वे सुरक्षित रहे। जो स्टूडेंट्स बस की आवाजाही बंद होने के कारण घर न जा सकें उन्हें ट्राईसिटी में रिश्तेदारों के घर भेजा गया। हमें खुशी है कि इस बार शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया गया और दोबारा पहले जैसी स्थिति उत्पन्न होने से शहर को बचाया गया।
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