डेरे के अर्श से जेल के फर्श तक का राम रहीम का सफर
विवादों से पुराना नाता रहा है डेरामुखी गुरमीत का
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
इस समय गुरमीत राम रहीम देश में सबसे विवादित नामों में से एक है। डेरामुखी का सरकारों में कितना दखल था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राम रहीम को जेड प्लस की सुरक्षा प्राप्त थी। जबकि उस समय भी इसके खिलाफ बलात्कार, यौन शोषण और हत्या जैसे संगीन मामले चल रहे थे। डेरामुखी का जन्म 15 अगस्त 1967 को राजस्थान के गंगानगर जिले के श्री गुरसर मोइदा नामक गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम मगहर और माता का नाम नसीब कौर है। पिता जमींदार थे। गुरमीत राम रहीम की शिक्षा छोटे से विद्यालय से हुई थी। 23 सितंबर 1990 को शाह सतनाम द्वारा आयोजित एक सत्संग में इन्होंने औपचारिक तौर पर सार्वजनिक रूप से संत की उपाधि धारण की। इसके बाद गुरमीत राम रहीम के नाम से जाना जाने लगा। गुरमीत ने हरजीत कौर से शादी की। विवाह के बाद एक पुत्र और दो पुत्री हुई। यह सभी बच्चे अपने नाम के पीछे पिता द्वारा लगाई गई उपाधि इंसा लगाते हैं।
गुरमीत सिंह राम रहीम का राजनीति में भी गहरी पैठ बनी हुई है। इनका राजनीतिक असर सदा से पंजाब के मालवा क्षेत्र में बरकरार रहा है। वर्ष 2014 में हरियाणा में होने वाले चुनाव में इन्होंने देश की तात्कालिक सबसे बड़ी और रूलिंग पार्टी भाजपा को इनका समर्थन प्राप्त हुआ था। इसके बाद फरवरी 2015 को दिल्ली विधानसभा में इन्होंने एक बार पुन: भाजपा को खुलकर अपना समर्थन यह कहते हुए दिया था कि दिल्ली में उनके कुल 20 लाख समर्थक हैं। भाजपा ही दिल्ली विधानसभा जीतेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और भाजपा को पूरी दिल्ली में केवल 3 सीटें प्राप्त हुईं थी। इसके उपरान्त इन्होंने बिहार विधान सभा में भी भाजपा के लिए कार्य किया और लगभग 3000 डेरा समर्थकों ने पूरे बिहार में पार्टी के प्रचार प्रसार में लगी रहीं। वहां भी भाजपाको हार का ही सामना करना पड़ा था।
सिखों से विवाद के बाद हुई थी खूब फजीहत
गुरमीत राम रहीम का सिखों से बहुत गहरा विवाद रहा है। इसकी वजह ये थी कि मई 2007 में गुरमीत सिंह ने सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह की नक़ल करते हुए उनके कॉस्टयूम और कलगी धारण किया और सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। राम रहीम पर भीड़ ने हमला किया था, लेकिन बिना मार खाए भागने में सफल हो गया था। इसके बाद उसने सार्वजनिक तौर पर इस घटना के लिए माफी मांगी थी। इसके बाद वर्ष 2009 में गुरमीत राम रहीम पर सिख धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की वजह से आपराधिक मामला सिरसा के कोर्ट में तथा वर्ष 2014 में बठिंडा कोर्ट में दर्ज कराया गया था। इसके बाद डेरा समर्थकों और सिखों के बीच एक तनाव पैदा हो गया था। 2 फरवरी 2008 को राम रहीम के दल पर विस्फोटक चीजों से हमला किया गया था और इसमें कुल 11 लोग घायल हुए थे। बाद में इस घटना के लिए ‘खालिस्तान लिबरेशन फ़ोर्स’ के लोगों को गिरफ्तार किया गया था।