पंचकूला के सीने पर आज भी हरे हैं पुराने जख्म
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। डेरा प्रमुख गुरमीर राम रहीम को भले ही उसके कुछ गुनाहों के लिए सजा सुनाई जा चुकी हो, लेकिन पंचकूला वासियों को अभी भी अपने साज हुए अन्याय के लिए न्याय की दरकार है। साध्वी यौन शोषण मामले में राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद शहर में हुई हिंसा को लोग आज भी नहीं भुले हैं। राम रहीम के समर्थकों ने कई करोड़ की निजी संपत्ति को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही आग के हवाले कर दिया था। दंगाइयों ने कई घरों को भी निशाना बनाते हुए शीशे तोड़ने से लेकर अंदर खड़ी गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया था। 25 अगस्त 2017 को हुई इस हिंसा के दौरान पंचकूला वासी अपने ही घरों में कैद होकर रह गए थे। इस दौरान करीब 42 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। हिंसा में करीब 100 से अधिक वाहन जलकर राख हो गए थे। प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक ने घोषणा की थी कि हिंसा के दौरान जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जाएगी, लेकिन घटना के डेढ़ साल बाद भी लोगों के वाहन जहां थानों में खड़े हैं, वहीं शिकायतें रोजनाचे में दर्ज कर होकर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। वाहन मालिक आज भी मुआवजे के इंतजार में हैं। लोगों का कहना है कि उनका क्या गुनाह था जिसकी उन्हीं ये सजा मिली है। हालांकि वीरवार को छत्रपति हत्याकांड में दोषियों को सजा सुनाए जाने के दौरान लोगों में किसी तरह का खौफ नहीं दिखा।