पंचकूला। फर्जीवाड़े के एक मामले में अंतरिम जमानत पर चल रहे आरोपी आशुतोष को अदालत से राहत मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. हिमांशु सिंह की अदालत ने 26 सितंबर 2025 को दी गई अंतरिम जमानत को स्थायी कर दिया है। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी यह साबित नहीं कर पाए कि आरोपी को 29 सितंबर के बाद जांच में शामिल होने के लिए कभी नोटिस दिया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पाया कि आरोपी 29 सितंबर को वकील के साथ थाना पहुंचा था लेकिन जांच अधिकारी ने उसके सहयोग न करने का आरोप लगाया था। साथ ही स्टेटस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि आरोपी की लोकेशन मुख्य आरोपी परवीन भल्ला के साथ पाई गई थी और दोनों सेक्टर-6 पंचकूला में मौजूद थे। पुलिस ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने खुद का नाम गौरव शर्मा बताया और पूरा नाम छिपाया।
बचाव पक्ष का आरोप – जांच अधिकारी ने किया अपमान
बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में कहा कि आरोपी ने जांच में पूरा सहयोग किय, लेकिन जांच अधिकारी ने अदालत के आदेशों के प्रति अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया और पुलिस स्टेशन में उनके साथ दुर्व्यवहार किया। वकील ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी ने आरोपी पर समझौते की रकम देने के लिए दबाव बनाया और धमकी दी कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
अदालत ने पुलिस को लगाई फटकार
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच एजेंसी कोई वसूली एजेंट नहीं बन सकती, विशेषकर जब मामला देखने में दीवानी विवाद से जुड़ा हो। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट भ्रामक है। वहीं अदालत ने कहा कि आरोपी से किसी प्रकार की बरामदगी शेष नहीं है।