पंचकूला। पंचकूला प्लाट आवंटन मामले में मंगलवार को ईडी कोर्ट में सुनवाई हुई । इसमें दो आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। वहीं ईडी कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपी सिद्घार्थ भारद्वाज कोर्ट में नहीं पेश हो रहे हैं। उन्हें नियम के मुताबिक पेश होना चाहिए। पेश नहीं होने का कारण भी बताना चाहिए। कोर्ट ने यह कहकर गैर जमानती वारंट जारी किया है। वहीं इस मामले में अन्य आरोपी सतपाल डागर कात्याल को भी अरेस्ट वारंट जारी किया। कोर्ट ने कहा कि डॉगर कात्याल को जो समन भेजा जा रहा है। वह रिसीव नहीं हो रहा है। इसलिए एक साल से समन रिसीव नहीं होने और कोर्ट में पुराने घर का पता देने पर अरेस्ट वारंट जारी किया है। वहीं इस मामले में आरोपी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पवन कांसल के वकील ने पेशी से छूट मांगी।
इस पर सीबीआई ने स्वीकृति दे दी। हरियाणा प्लाट आवंटन मामले में सभी आरोपियों के वकील पेश हुए। इसमें मुख्य आरोपी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा आईएएस धर्मपाल सिंह नागल, सुरजीत सिंह, सुभाष चंद्र कंसल, नरेंद्र सिंह सोलंकी हैं। वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा के भतीजे की पत्नी रेनू हुड्डा, नंदिता हुड्डा, मोना बेरी, प्रदीप कुमार, कंवरप्रीत सिंह संधू, डागर कत्याल, डॉ. गणेश दत्त, अमन गुप्ता, लेफ्टिनेंट कर्नल रिटायर्ड ओपी दहिया, मनजोत कौर, वाईपीटी एंटरटेनमेंट हाउस प्रा. लिमिटेड के सिद्धार्थ भारद्वाज, भारत भूषण तनेजा, अनुपम सूद को भी आरोपी बनाया गया था। फरवरी में हुई सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने पंचकूला स्थित ईडी की विशेष अदालत में 22 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। ईडी ने पंचकूला इंडस्ट्रियल प्लॉट अलॉटमेंट स्कैम में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) के तहत यह चार्जशीट दाखिल की थी।
यह है मामला
दायर चार्जशीट के मुताबिक हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिचितों को 30.34 करोड़ रुपये में 14 औद्योगिक भूखंडों को गलत तरीके से आवंटित किया था। आरोप पत्र में चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शामिल हैं। ईडी ने हरियाणा सतर्कता ब्यूरो द्वारा एक प्राथमिकी के आधार पर 2015 में जांच शुरू की थी। प्राथमिकी को 2016 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने ईडी को केस जांच के लिए ट्रांसफर किया था। ईडी की तरफ से इस मामले की जांच करने के बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित चार आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की 120-बी, 201, 204, 409, 420, 467, 468, 471, 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।