तीन दिन के नवजात से पहले पीजीआई में 11 माह के नवजात का अंगदान कराए जाने का रिकार्ड था। वह बच्चा भी लड़का था। 2017 जुलाई में चंडीगढ़ के 11 माह के प्रीतम का पीजीआई में अंगदान कराया गया था। उसकी भी दोनों किडनी एक वयस्क को प्रत्यारोपित की गई थी।
आंखों में थे आंसू और नमन में झुके थे सिर
अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस नवजात की बॉडी को परिजनों को सौंप दिया गया। वापस लौटते वक्त एंबुलेंस के बाहर पीजीआई रोटो के साथ ही ऑर्गन ट्रांसप्लांट की टीम उस नन्हे फरिश्ते को नमन कर रही थी। उनकी आंखों में आंसू और उस नन्हे फरिश्ते के परिजनों को शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना साफ झलक रही थी।
ट्रांसप्लांट के लिए बच्चों के अंगों को पुनर्प्राप्त करना दुर्लभ है। ऐसे में अगर नवजात जन्मजात विसंगतियों वाला हो तो मामला और गंभीर होता है। ऐसे केस में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण दोनों ही प्रक्रियाएं बेहद जटिल होती हैं, लेकिन पीजीआई के विशेषज्ञों की टीम ने पैरामेडिकल के साथ मिलकर इस चुनौती को स्वीकार किया और सफलता प्राप्त की।
- डॉ. आशीष शर्मा, एचओडी, रिनल ट्रांसप्लांट सर्जरी, पीजीआई