पंचकूला। कोरोना काल में व्यापारियों का धंधा अवश्य मंदा चल रहा हो लेकिन ऑनलाइन ठगी का बाजार गरम है। ठग लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। साइबर सेल भी ठगों के फैलते जाल से परेशान है। डीसीपी ने भी लोगों को ठगों से अलर्ट रहने के लिए एक हफ्ते में दो बार गाइड लाइन जारी की है। ठग फेसबुक में दोस्ती कर न्यूड वीडियो दिखाकर ब्लैक मेल करने, केवाईसी अपडेट करने के नाम पर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। जिले में पुलिस जनवरी से जुलाई तक 87 लोगाें से ऑनलाइन ठगी कर चुकी है।
पंचकूला में टॉवर लगाने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस लेने, फेसबुक पर दोस्ती कर महिला न्यूड वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल करने के मामले सामने आए हैं। इस तरह के हालात में लोगों से लाखों की ठगी की गई है। पुलिस भी केवल केस दर्ज कराने तक ही सीमित है। पुलिस की तरफ से फेसबुक, ओलएलएक्स में सामान खरीदने और बेचने के अलावा एटीएम कार्ड ब्लाक होने, केवाईसी अपडेट करने के नाम पर ठगी के नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। इस बारे में बैंक और पुलिस द्वारा बार-बार लोगों को जागरूक किया जा रहा है, इसके बाद भी लोग इन ठगों के चंगुल में पढ़ जा रहे हैं। अब लोग स्वयं को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।
केस नंबर -1
फेसबुक पर महिला ने 69 साल के बुजुर्ग से दोस्ती कर उनका अश्लील वीडियो देखने का वीडियो रिकार्ड कर लिया। इसके बाद ब्लैकमेल कर 16 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। सेक्टर-20 पुलिस ने 22 जुलाई को केस दर्ज किया है। अभी तक इस पर पुलिस किसी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
केस नंबर -2
10 मई 2018 को राजेंद्र सिंह यादव ने पिंजौर थाने में शिकायत दी कि उनके साथ 27 लाख रुपये की धोखाधड़ी टॉवर लगाने के नाम पर ले ली गई है। अभी तक उन्हें यह पैैसे वापस नहीं मिले हैं। पिंजौर पुलिस ने नौ लोगों पर केस दर्ज किया है।
केस नंबर -3
35 लाख की ठगी मामले में महिला से जनवरी में 95 हजार रुपये की ठगी हुई थी। इसके बाद सेक्टर-5 थाना पुलिस केस दर्ज करने तक ही सीमित है। अभी तक इस पर कुछ भी नहीं हो पाया है।
यह कहते हैं साइबर एक्सपर्ट
साइबर एक्सपर्ट राजेश राणा ने बताया कि इसके लिए अन्य राज्यों की पुलिस को मिलकर काम करना चाहिए। सही तालमेल नहीं होने के कारण लोग पकड़ में नहीं आते हैं। ठगी करने के बाद इसलिए पुलिस केवल केस दर्ज करने तक ही सीमित रह जाती है। वहीं डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड का सीवीवी नंबर किसी को नहीं बताएं। फोन का इस्तेमाल करने के बाद किसी को ओटीपी नंबर नहीं भेजें। लोग सभी सावधानी बरतें तभी लोगों के साथ साइबर क्राइम नहीं होगा।
बरतें ये सावधानियां
- अपना बैंक अकाउंट स्टेटमेंट समय पर जांचते रहें।
- बैंक ट्रांजेक्शन के लिए एसएमएस और ईमेल अलर्ट चालू रखें
- मोबाइल नंबर सोशल नेटवर्किंग साइट पर विजिबल नहीं करें।
- फेसबुक पर बिना जान पहचान के लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें।
- खाते का केवाईसी अपडेट करने के नाम पर पासवर्ड शेयर नहीं करें।
पुलिस की ओर से ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए लगातार गाइड लाइन जारी की जा रही है। इससे लोगों को बचाव करना चाहिए। अगर किसी प्रकार से कोई ऑनलाइन वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल करता है तो पैसे ट्रांसफर करने के बजाय लोग पुलिस को शिकायत करें। - मोहित हांडा, पुलिस उपायुक्त, पंचकूला पुलिस