कोविड-19 के खिलाफ जंग के दौरान आर्थिक तंगहाली का सामना कर रही पंजाब सरकार अपने मुलाजिमों के वेतन में बड़ा कट लगाने पर विचार करने लगी है। सरकार के लिए चालू माह का वेतन और पेंशन की अदायगी करना कठिन हो चुका है। इसे देखते हुए वित्त विभाग ने ही सरकार को कर्मचारियों के भत्तों की लंबी-चौड़ी रकम याद दिलाई है।
केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए महंगाई भत्ते को अगले साल जुलाई तक फ्रीज कर दिए जाने के फैसले के बाद पंजाब सरकार ने भी इसी राह पर चलने का मन बना लिया है। फिलहाल वित्त विभाग इसका खाका तैयार कर रहा है जिससे यह भी साफ हो सके कि महंगाई भत्ता फ्रीज किए जाने से प्रदेश सरकार का कितना पैदा बचेगा। वैसे मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य सरकार कर्मचारियों की श्रेणी के अनुसार वेतनमान में 10, 20 और 30 फीसदी कटौती का प्रस्ताव पहले ही ला चुकी है, जिसका कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया है।
सूत्रों के अनुसार, इस माह के अंत तक राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों का डीए फ्रीज करने संबंधी फरमान सुनाया जा सकता है। उधर, भारतीय मजदूर संघ ने जहां केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं पंजाब के कर्मचारी संगठन भी लामबंद होने लगे हैं। साझा मुलाजिम मंच के कनवीनर सुखचैन सिंह खैरा ने इस संबंध में कहा कि सभी कर्मचारी अपना एक-एक दिन का वेतन देने का एलान कर चुके हैं। यही नहीं, राज्य के वर्ग-ए अधिकारी अपनी सैलरी का 30 फीसदी तक अंश देने की घोषणा कर चुके हैं।
कर्मचारियों के डीए की एक बहुत बड़ी रकम पहले ही सरकार की तरफ बकाया है। अगर इसके बाद भी सरकार ने डीए फ्रीज करने का फैसला लिया तो कर्मचारी संगठन इसका कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन में कटौती के संकेत पिछले महीने भी दिए थे और संभव है कि केंद्र सरकार के आदेश की आड़ में राज्य सरकार भी ऐसा कदम उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह का फैसला कर्मचारियों के साथ अन्याय होगा।