पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और वहां पर हो रहे विनाश ने मैदानों में तबाही की आशंका को बढ़ा दी है। जिन नदियों के रास्ते पहाड़ों से आने वाले पानी का बहाव गुजरता है, वहां बड़ी-बड़ी रिटेनिंग वॉल खड़ी कर पानी निकासी के रास्ते पर इमारतें खड़ी की जा रही हैं।
कौशल्या के बाद झजरा नदी क्षेत्र में भी इमारतें खड़ी करने तैयारी चल रही है। झजरा नदी के पानी का बहाव कौशल्या से भी तेज होता है। इसे रोकने के लिए कोई डैम नहीं है। यहां पानी का तेज बहाव आया तो कोई रिटेनिंग वाॅल पानी को रोक नहीं पाएगा। यहां नदी के अंदर अवैध निर्माण कार्य चल रहा है। यहां फ्लैट बनाकर लोगों को महंगे दामों पर बेच दिए जाएंगे। अभी नदी क्षेत्र में दीवार खड़ी कर दी गई है।
सूत्रों ने बताया कि पहले भी कई बार सिंचाई विभाग की ओर से नदी क्षेत्र में चल रहे अवैध निर्माणों को लेकर नोटिस जारी किया जा चुका है। वहीं, झजरा नदी क्षेत्र में चल रहे अवैध निर्माण के लिए भी सिंचाई विभाग ने नोटिस जारी किया था, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते मामले को दबा दिया गया। अब यहां धड़ल्ले से नदी के अंदर निर्माण चल रहा है।
सूरजपुर-सुखोमाजरी बाईपास सुखना चो से सटा हुआ है। यहां भी अवैध निर्माण के चलते करोड़ों रुपये की लागत से बना बाईपास धंसने लगा है। अवैध निर्माण के चलते पानी का रुख बाईपास की तरफ हो गया है, जिसके चलते सड़क किनारे से धंसने लगी है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार किसी भी नदी के अंदर कंस्ट्रक्शन वर्क नहीं कर सकते हैं। इससे आसपास की आबादी के साथ हाईवे को खतरा हो सकता है। साल 2014 में सिंचाई विभाग की विजिलेंस जांच रिपोर्ट में डैम के निर्माण कार्य में खामियों को देखते हुए कौशल्या डैम को वाटर बम की उपाधि दी थी। इसमें साफ कहा गया था कि डैम से भविष्य में पंचकूला के साथ चंडीगढ़ को भी खतरा है। -विजय बंसल, एडवोकेट
कौशल्या और झाजरी नदी में अवैध निर्माण से जुड़ा मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर बिना एनओसी काम चल रहा होगा तो सोमवार को जांच कर नोटिस जारी किया जाएगा। -मुनीष, एसडीओ सिंचाई विभाग, पंचकूला