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पंचकूला में बढ़ रहा खतरा: जिसे सिंचाई विभाग की विजिलेंस टीम ने बताया था वाटर बम... वहां खड़ी हो रहीं इमारतें

Mon, 11 Aug 2025 01:49 PM IST
निवेदिता वर्मा दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला

सार

पिंजौर के कालका-जीरकपुर हाईवे से लगते कौशल्या नदी पर निर्माण करने वाली कंपनियां धीरे-धीरे कब्जा कर रहे हैं। यह खुलासा अमर उजाला की पड़ताल में हुआ है।
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कौशल्या डैम के रास्ते में बनाए जा रहे मकान - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और वहां पर हो रहे विनाश ने मैदानों में तबाही की आशंका को बढ़ा दी है। जिन नदियों के रास्ते पहाड़ों से आने वाले पानी का बहाव गुजरता है, वहां बड़ी-बड़ी रिटेनिंग वॉल खड़ी कर पानी निकासी के रास्ते पर इमारतें खड़ी की जा रही हैं। 

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पिंजौर के कालका-जीरकपुर हाईवे से लगते कौशल्या नदी पर निर्माण करने वाली कंपनियां धीरे-धीरे कब्जा कर रहे हैं। यह खुलासा अमर उजाला की पड़ताल में हुआ है। प्राकृतिक पानी को रास्ता नहीं मिलने की वजह से अभी सिर्फ नेशनल हाईवे सहित आसपास के कुछ आबादी वाले एरिया क्षतिग्रस्त हुआ है। 

जिस दिन डैम फटा पंचकूला, अमरावती के साथ चंडीगढ़ को भी नुकसान पहुंचाएगा। इन अवैध निर्माणों को रोकने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है, लेकिन विभाग कार्रवाई के नाम पर नोटिस देने तक सीमित है। नदी क्षेत्र में स्कूल का भी निर्माण किया गया है, जो स्कूल के साथ नेशनल हाईवे और आसपास की घनी आबादी के लिए खतरनाक है।
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साल 2023 का मंजर अभी पंचकूला भूल नहीं पाया है, जिसमें नेशनल हाईवे, पुल सहित 80 मकान धराशायी हो गए थे। यह स्थिति तब की है, जब सिंचाई विभाग की विजिलेंस टीम ने जांच रिपोर्ट में कौशल्या डैम को निर्माण पर सवाल उठाते हुए वाटर बम बताया था।

कौशल्या के बाद झजरा नदी में भी चल रहा अवैध निर्माण

कौशल्या के बाद झजरा नदी क्षेत्र में भी इमारतें खड़ी करने तैयारी चल रही है। झजरा नदी के पानी का बहाव कौशल्या से भी तेज होता है। इसे रोकने के लिए कोई डैम नहीं है। यहां पानी का तेज बहाव आया तो कोई रिटेनिंग वाॅल पानी को रोक नहीं पाएगा। यहां नदी के अंदर अवैध निर्माण कार्य चल रहा है। यहां फ्लैट बनाकर लोगों को महंगे दामों पर बेच दिए जाएंगे। अभी नदी क्षेत्र में दीवार खड़ी कर दी गई है।

राजनीतिक दबाव के चलते मामला दबा 

सूत्रों ने बताया कि पहले भी कई बार सिंचाई विभाग की ओर से नदी क्षेत्र में चल रहे अवैध निर्माणों को लेकर नोटिस जारी किया जा चुका है। वहीं, झजरा नदी क्षेत्र में चल रहे अवैध निर्माण के लिए भी सिंचाई विभाग ने नोटिस जारी किया था, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते मामले को दबा दिया गया। अब यहां धड़ल्ले से नदी के अंदर निर्माण चल रहा है।

अवैध निर्माण के चलते सुरजपुर-सुखोमाजरी बाइपास धंसने लगा

सूरजपुर-सुखोमाजरी बाईपास सुखना चो से सटा हुआ है। यहां भी अवैध निर्माण के चलते करोड़ों रुपये की लागत से बना बाईपास धंसने लगा है। अवैध निर्माण के चलते पानी का रुख बाईपास की तरफ हो गया है, जिसके चलते सड़क किनारे से धंसने लगी है।

सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार किसी भी नदी के अंदर कंस्ट्रक्शन वर्क नहीं कर सकते हैं। इससे आसपास की आबादी के साथ हाईवे को खतरा हो सकता है। साल 2014 में सिंचाई विभाग की विजिलेंस जांच रिपोर्ट में डैम के निर्माण कार्य में खामियों को देखते हुए कौशल्या डैम को वाटर बम की उपाधि दी थी। इसमें साफ कहा गया था कि डैम से भविष्य में पंचकूला के साथ चंडीगढ़ को भी खतरा है। -विजय बंसल, एडवोकेट

कौशल्या और झाजरी नदी में अवैध निर्माण से जुड़ा मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर बिना एनओसी काम चल रहा होगा तो सोमवार को जांच कर नोटिस जारी किया जाएगा। -मुनीष, एसडीओ सिंचाई विभाग, पंचकूला

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