चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बैंक कर्मचारी की मौत के चलते उसके बेटे के अनुकंपा आधार पर नौकरी के दावे को लेकर दाखिल याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नौकरी अधिकार नहीं बल्कि उपकार है। यह मृत कर्मी के परिवार को अभाव और भुखमरी से बचाने के लिए है न की परिवार में किसी को नौकरी देने के उद्देश्य से। याचिकाकर्ता नियुक्ति की अधिकतम आयु सीमा को पार कर चुका है और ऐसे में उसके हक में फैसला नहीं सुनाया जा सकता। याचिका दाखिल करते हुए पटियाला निवासी गगनप्रीत सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि उसके पिता सरकारी बैंक में कार्यरत थे और उनकी मौत हो गई थी। याची ने अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया तो उसे रद्द कर दिया गया। इसके पीछे दलील दी गई कि आवेदन के समय याची की आयु 30 वर्ष थी, जबकि बैंक में नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु 28 वर्ष है।
याची ने बताया कि अनुकंपा आधार पर एक लड़की को भी नियुक्ति दी गई है और उसे आयु में छूट का लाभ भी दिया गया है। बैंक ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जिस लड़की को नौकरी के लिए आयु में छूट दी गई है, उसकी मां बैंककर्मी थी और वह अपने पिता से अलग रह रही थी। साथ ही उसे केवल 3 माह की आयु छूट का लाभ दिया गया है।
हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों पर विचार के बाद कहा कि यदि आयु में छूट का आदेश दिया गया तो यह नए सिरे से अधिकतम आयु निर्धारित करने जैसा होगा। वैसे भी अनुकंपा आधार पर नौकरी कोई अधिकार नहीं है। याची की वर्तमान आयु 38 वर्ष है और ऐसे में उसके पक्ष में आदेश जारी नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।