पंचकूला। मौसम में बदलाव के कारण सुबह-शाम ठंड बढ़ने के बाद सिविल अस्पताल में निमोनिया और छाती जाम के मरीज बढ़ गए हैं। इससे सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हैं। बच्चों की ओपीडी 300 तक पहुंच गई है। छाती जाम के रोजाना 20 बच्चे पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती हो रहे हैं। वहीं, वार्ड में बने आईसीयू में 20 बच्चों को ऑक्सीजन और वेंटिलेटर पर रखने के बाद हालात में सुधार हो रहा है। इन्हें ठीक होने में एक सप्ताह से अधिक का समय लग रहा है।
डॉक्टरों ने बताया कि निमोनिया के रोज 10 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। निमोनिया के लक्षण में छाती में जकड़न या दर्द, सांस लेने में दिक्क्त, तेज बुखार के अलावा पीले, हरे या खूनी बलगम या थूक के साथ खांसी आना के मामले हो सकते हैं। इस तरह का लक्षण दिखे तो तुरंत जांच करानी चाहिए और डॉक्टर की सलाह पर दवाई देनी चाहिए।
निमोनिया से इस तरह से करें बचाव
- निमोनिया से बचाव के लिए बच्चों का टीकाकरण सही तरीके से करवाएं।
- स्वस्थ जीवनशैली में पौष्टिक आहार के साथ बीमार लोगों से बच्चोंं को दूर रखा जाए।
- अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोएं। खासकर खाने से पहले या शौचालय का उपयोग करने के बाद।
- साबुन और पानी उपलब्ध न हो तो अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें।
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिशू या कोहनी से ढकें।
बच्चे की छाती जाम
मेरे बेटे की छाती जाम हो गई। अस्पताल इलाज के लिए लाए हैं। आईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन लगाने के बाद आराम मिला है। अभी तक अस्पताल में इलाज चल रहा है।
-शालू निवासी विकास नगर, तीमारदार
बेटे को बुखार के बाद उल्टी, निमोनिया की शिकायत
मेरे पांच साल के बच्चे को बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी हुई है। कई बार उल्टी हुई। यहां पर लेकर आए तो निमोनिया की शिकायत निकली। ऑक्सीजन देने के बाद हालत ठीक है। एक सप्ताह से बेटे का इलाज चल रहा है। -सुनीता रानी, निवासी इंदिरा कॉलोनी
बच्चों को ठंड से बचाएं
मेरे बेटे को इलाज चल रहा है। लगातार आईसीयू में रखने के बाद अभी तक राहत नहीं मिली है। ठंड लगने के बाद निमोनिया की शिकायत हुई थी। बच्चों को ठंड से बचाएं। -श्यामा देवी निवासी बुढ़नपुर
कोट
मौसम में बदलाव के कारण अस्पताल में इलाज के लिए उल्टी दस्त के साथ निमोनिया के मामले आ रहे हैं। वार्ड में पूरी तैयारी है। आए हुए बच्चों का इलाज किया जा रहा है। -डॉ. मक्ता कुमार, सीएमओ, सिविल अस्पताल