पंचकूला। स्वच्छता सर्वेक्षण-2022 में टॉप लिस्ट में आने के लिए बेशक नगर निगम ने कवायद शुरू कर दी है, लेकिन ओवरऑल स्वच्छता रैंकिंग में मेरा पंचकूला को मेरी पहचान बनाने के लिए विभाग को कागजों से बाहर निकलकर धरातल पर काम करना होगा। एक दशक बाद भी जिले का शहरी क्षेत्र अतिक्रमण, स्लम, स्ट्रे डॉग्स प्लास्टिक मुक्त बनाना होगा। इसके अलावा सबसे बड़ा मसला है, शहर से निकलने वाले सॉलिड वेस्ट का। इसके लिए नगर निगम ने 11 करोड़ का एस्टीमेट तैयार रेट अप्रूवल के लिए अर्बन लोकल बॉडी को भेजा है। वहीं अभी लीकेसी वेस्ट प्लांट काम अधर में लटका है। इसके लिए नगर निगम को प्रयास तेज करना होगा। अगर प्लांट समय पर लग जाता है, तो पंचकूला को सीधे ही करीब 1000 नंबर का फायदा होगा।
2021 में 99 रैंक मिला
स्वच्छ भारत मिशन में पंचकूला नगर निगम पंचकूला दो वर्षों के दौरान स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान में 434 शहरों में से पंचकूला 211वें स्थान पर था। 2018 में 4302 शहरों में से पंचकूला 142वें पर पहुंच गया था। नगर निगम पंचकूला ने वर्ष 2019 में शानदार उछाल मारकर 4267 शहरों में से 71वां रैंक हासिल किया। वर्ष-2020 में 56वां स्थान हासिल किया था, लेकिन 2021 में केंद्रीय मंत्रालय द्वारा स्वच्छता रैंकिंग के लिए कुछ नियम कड़े करते ही पंचकूला असफल रहा और पंचकूला का रैंक 99 पर पहुंच गया। पंचकूला की असफलता का एक सबसे बड़ा कारण शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ना होना है, जिसके कारण बहुत नंबर पंचकूला के कट जाते हैं। पिछले कई वर्षों से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का टेंडर लटका हुआ है।
इंदौर से सीख लेने की जरूरत
ऐसे में अगर किसी शहर की रैंकिंग नीचे आ रही है तो यह उस शहर के लोगों के लिए भी चिंता की बात होनी चाहिए। बता दें कि बीते वर्ष पंचकूला के परिणाम देखकर नगर निगम के निर्वाचित प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने दावा किया था कि शहर की रैंकिंग सुधारने के लिए जी जान लगा देंगे, लेकिन सर्वेक्षण 2021 के परिणाम से पता चलता है कि उनकी ओर से कितनी मेहनत की गई है। बता दें कि मध्यप्रदेश का इंदौर शहर देश के लिए उदाहरण है कि नंबर वन की रैंकिंग को लगातार कैसे बनाए रखा जा सकता है। यह लगातार पांचवीं बार है, जब इंदौर देश के सर्वाधिक स्वच्छ शहरों पर पहले स्थान पर है। पंचकूला नगर निगम अधिकारियों को इंदौर से सीख लेनी चाहिए।
बड़े डस्टबिन टूटे, नए की दरकार
स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर अंक लाने के लिए पंचकूला शहरी क्षेत्र में रखे गए बड़े डस्टबिनों को बदलना होगा। क्योंकि अधिकतर शहरी एरिया के डस्टबिन टूट हुए हैं। नतीजा कूड़ा सड़कों पर पड़ा रहता है। यह कहना है इंदिरा कालोनी निवासी डॉ. राम प्रसाद का। उन्होंने बताया कि इंदिरा कालोनी, बुढ़नपुर में बड़े डस्टबिन टूट गए हैं। ये हाल सिर्फ कॉलोनियों का ही नहीं है, बल्कि सेक्टरों का भी है। यह मुद्दा कई बार नगर निगम की बैठक में उठ चुका है, लेकिन अब तक टेंडर से बात आगे नहीं पहुंची।