परिवहन विभाग की लापरवाही के कारण हरियाणा रोडवेज की 13 में से दस लो फ्लोर बसें कंडम हो गई हैं। ये बसें टूल और मैकेनिक के अभाव में पंचकूला सेक्टर-5 के बस स्टैंड में खड़ी हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग बस यात्रियों की सुविधा को लेकर कितना गंभीर है। जबकि प्रदेश की सरकार यात्रियों को बेहतर सुविधा मुहैया करवाने को लेकर लगातार दावे कर रही है। इन दावों की जमीनी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने रविवार को बसों की रियलिटी चेक की तो सारे दावे खोखले साबित हुए।
क्यों नहीं बन रही हैं बसें
बस स्टैंड के मुलाजिमों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बस बनाने वाली कंपनी ने इनके पुर्जे देने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इन बसों के मॉडल बंद हो चुके हैं, जिसकी वजह से पूरे प्रदेश में करीब 80 फीसदी बसें कंडम हालत में डिपो के अंदर खड़ी हैं। मिली जानकारी के मुताबिक करोड़ों रुपये खर्च करके बसें खरीदी गई थीं। खरीदारी के समय इन बसों की मेंटेनेंस का जिम्मा कंपनी ने लिया था, बाद में ये मॉडल बंद हो जाने के बाद कंपनी ने हाथ खींच लिए।
वर्कशॉप में मैकेनिक की भर्ती नहीं
प्रदेश सरकार की ओर से सिटी बस सेवा की मेंटेनेंस के लिए मैकेनिक की भर्ती नहीं की गई। इस कारण बसें कंडम होती चली गईं।
बसों में नहीं लगे हैं प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स
अगर आपको हरियाणा रोडवेज की बसों में सफर करना है तो प्राथमिक उपचार बॉक्स साथ लेकर चलिए। क्योंकि इन बसों में प्राथमिक उपचार बॉक्स लगा नहीं। लॉन्ग रूट की कुछ बसों में लगा भी है तो सिर्फ दिखाने के लिए। अमर उजाला की टीम ने जब बसों का जायजा लिया तो लोकल बसों में प्राथमिक उपचार बॉक्स नहीं मिले। एक दो बसों में मिले भी तो वह खाली थे। इसके अलावा अधिकतर बसों के फायर उपकरण एक्सपायर हो चुके हैं।
क्या कहते हैं हरियाणा रोडवेज के अधिकारी
जो कंडम बसें हैं, उनके पुर्ज मिल पा रहे थे। इनमें से चार पांच बसों को रिपेयर कराया गया है। जो चलाई जा रही हैं। जल्द अन्य बसों को रिपेयर कराकर चलाया जाएगा।
-डॉ. ओम शर्मा, टीएम, हरियाणा रोडवेज।
कोट्स
हरियाणा रोडवेज की लोकल और लॉन्ग रूट की बसों में प्राथमिक उपचार बॉक्स नहीं होने और बसों के एक्सपायर फायर टेंडर की खुद जांच करूंगा। इसे तुरंत लगवाया जाएगा।
-सतीश सिंगला जीएम, हरियाणा रोडवेज।