चंडीगढ़। ट्राइसिटी और खास तौर पर चंडीगढ़ में बढ़ती जनसंख्या के साथ पैदा हुई ट्रैफिक, मैनपावर, हरियाली और अन्य समस्याओं पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए इन विषयों पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। साथ ही वरिष्ठ वकील अमित झांझी को कोर्ट का सहयोग करने के लिए कोर्ट मित्र नियुक्त किया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह शहर जिसे सिटी ब्यूटीफुल के नाम से जाना जाता है बढ़ती जनसंख्या और ट्रैफिक के कारण अपने नाम का अर्थ खोता जा रहा है। शहर को बसाते हुए यह नहीं सोचा गया था कि 5 लाख की आबादी वाली सोच गलत साबित होगी और आंकड़ा इससे कई गुना ज्यादा होे जाएगा। साथ सटे पंचकूला और मोहाली का दबाव भी शहर को ही झेलना पड़ रहा है। पंजाब में आतंकवाद के दौर के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने ट्राइसिटी का रुख किया। दो राज्यों की राजधानी होने के नाते यहां पर नौकरी के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं और इसी का नतीजा है कि शहर में ट्रैफिक की समस्या इतनी बढ़ गई है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह शहर केंद्र शासित प्रदेश है जिसके कारण अधिकारी यहां पर डेपुटेशन पर आते हैं और अपना कार्यकाल पूरा कर चले जाते हैं। शहर को भविष्य के लिहाज से तैयार करने के लिए अच्छी योजना की जरूरत है, जिसके लिए समय लगता है। अधिकारियों को यह समय ही नहीं मिल पाता जिसके कारण अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही यूटी प्रशासन से 40 साल पहले और वर्तमान की काडर स्ट्रेंथ से जुड़ी जानकारी मांगी है। कोर्ट ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि विकास के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त मैन पावर है या नहीं।
साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि शहर में जिस तेजी से ट्रैफिक बढ़ रहा है उसे देखते हुए इसका विकल्प तलाशना आज की जरूरत बन गया है। यदि अभी निर्णय नहीं लिया गया तो बाद में हालात को संभालना मुश्किल होगा। आसपास से बड़ी संख्या में लोग वाहनों से आते हैं और यदि उन्हें मोनो रेल/मेट्रो रेल का विकल्प मिले तो शहर पर से ट्रैफिक का बोझ काफी हद तक कम हो सकता है। शहर को यदि कालका, परवाणु, यमुनानगर, अंबाला, पटियाला, नवांशहर और रोपड़ से मोनो रेल/मेट्रो रेल के माध्यम से जोड़ दें तो यह बहुत कारगर साबित होगा।
हाईकोर्ट ने पूछे ये सवाल
- खुड्डा अली शेर की ओर लगे कूड़े के ढेर को हटाने के लिए क्या किया जा रहा है
- राजेंद्र पार्क को क्यों नहीं वन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा
- सुखना से पेक की ओर जाने वाले उत्तर मार्ग को क्यों बंद किया गया है
- दीमकों का भोजन बने वृक्षों की जगह नए लगाने के लिए अभी तक क्या कदम उठाए गए हैं
- शहर के वृक्षों (जीवित व मृत) का आंकड़ा सौंपा जाए। मृत वृक्ष हटाए जाएं क्योंकि यह आम लोगों के जीवन को संकट में डाल सकते हैं।
- ग्रीन बेल्ट और नालों में मलबा गिराने पर रोक लगाएं और ऐसा करने वालों पर भारी जुर्माना
- साइकिल ट्रैक और इनपर लगी लाइटों की सौंपी जाए जानकारी