हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
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हरियाणा सरकार लोगों को झांसे में लेकर निवेश कराने वाली चिटफंड कंपनियों पर शिकंजा कसने जा रही है। चिटफंड और मनी सरकुलेशन योजनाओं पर सरकार ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। कंपनियां, फर्म, लोग या व्यापार संघ ऐसी कंपनियों में भविष्य में निवेश नहीं कर पाएंगे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा धन परिसंचरण योजना (प्रतिबंध) नियम, 2022 को मंजूरी दे दी गई।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि ये नियम गजट अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी होंगे। चिट मूल्य एवं धनपरिसंचरण योजना (प्रतिबंध) अधिनियम, 1978 की धारा 13 के प्रावधानों में राज्यों को यह अधिकार है कि वे नियम बना सकते हैं। नियमों के अनुसार लोग, कंपनियां, फर्म या व्यापार संघ गुप्त धन परिसंचरण योजनाओं सहित किसी भी प्रकार के चिटफंड को न तो बढ़ावा दे पाएंगे, न ही उनका संचालन कर सकेंगे।
इन पर कार्रवाई के लिए पुलिस नोडल विभाग रहेगा। राज्य, केंद्र सरकार, इनके तहत अन्य सरकारी एजेंसियों और भारतीय रिजर्व बैंक के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए पुलिस विभाग ही उत्तरदायी होगा। चिटफंड के मामलों में जांच करने पर अगर समुचित तथ्य निकलकर आते हैं तो मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कंपनी, फर्म या व्यापार संघ पर मामला दर्ज कराकर अनुसंधान अधिकारी चिट मूल्य एवं धनपरिसंचरण योजना (प्रतिबंध) अधिनियम, 1978 (1978 के केंद्रीय अधिनियम 43 ) के प्रावधानों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी को पूरी रिपोर्ट देंगे। पुलिस प्राधिकरण ऐसे व्यवसायों को बंद करवाने के लिए कार्रवाई करेगा। जिन मामलों में कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार सक्षम है, उनमें संबंधित मंत्रालय के पास कंपनी को बंद कराने के लिए सिफारिश करनी होगी।
गोल्डन फॉरेस्ट, फ्यूचर मेकर में बड़ा घोटाला आ चुका सामने
हरियाणा में चिटफंड कंपिनयों का बड़ा जाल है। कुकरमुत्तों की तरह ये शहर-शहर फैली हुई हैं। प्रदेश में गोल्डन फॉरेस्ट और फ्यूचर मेकर कंपनियों के बड़े घोटाले सामने आ चुके हैं। इनमें हजारों लोगों का करोड़ों रुपये फंसा हुआ है। इसके अलावा छोटी-मोटी कंपनियों के राशि निवेश कराकर भागने के अनेक मामले सामने आते रहते हैं। सरकार ने इनसे लोगों को बचाने के लिए ही चिटफंड कंपनियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है।