चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के 42 से 45 हजार फ्लैट्स आवंटियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सीएचबी के पुराने मकानों में फाउंडेशन बीम नहीं होने के चलते इनमें रहने वाले 5 लाख से अधिक लोग भूकंप से सुरक्षित नहीं हैं। हालांकि बोर्ड नए फ्लैट्स मानकों के अनुसार ही बना रहा है लेकिन पुराने मकान जस के तस पड़े हैं। शिकायत मिलने के बाद यूटी प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने चंडीगढ़ प्रशासन के होम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता को जांच के निर्देश दिए हैं।
सीएचबी द्वारा सेक्टर 38 वेस्ट, 51, 53 सहित कई जगहों पर आम लोगों को फ्लैट अलॉट किए गए हैं। बोर्ड के पूरे शहर में करीब 62 हजार फ्लैट्स हैं। इनमें लगभग सात लाख लोग रहते हैं। जानकारी के मुताबिक, बोर्ड बोर्ड द्वारा बनवाए गए करीब 42 से 45 हजार फ्लैट्स ऐसे हैं जिनकी फाउंडेशन कमजोर है। यह हाल तब है जब केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ में मकानों के निर्माण कार्य में फाउंडेशन बीम सहित भूकंपरोधी संबंधी सभी सुझावों पर अमल करने की हिदायत दी गई है।
सीएचबी नए मकानों के निर्माण में मानकों को पूरी तरह से लागू कर रहा है लेकिन पुराने बने फ्लैट्स की ओर बोर्ड का ध्यान नहीं जा रहा है। यही वजह है कि यहां के रहने लगभग 5 लाख लोग असुरक्षित हैं। पुराने मकानों को भूकंपरोधी बनाने के लिए भारत सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके बाद भी इन फ्लैट्स पर काम नहीं हो रहा है। इन पुराने मकानों को रेस्ट्रोफिटिंग तकनीक से मरम्मत के बाद क्रैक भले ही आ जाए लेकिन ये गिरेंगे नहीं।
सीएचबी के द्वारा पुराने मकानों की मरम्मत नहीं कराए जाने को लेकर सेक्टर 46 की रहने वाली सोनिया शर्मा ने पंजाब के गवर्नर व यूटी प्रशासक को शिकायत पत्र देकर बताया कि बोर्ड किस प्रकार अपने अलॉटियों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासक ने पूरे मामले की जांच प्रशासन के होेम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता को सौंपी है जिसमें कहा गया कि मामला अति गंभीर है इसलिए जांच जरूरी है।