प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दायर तेजबहादुर की याचिका के मामले में बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। प्रधानमंत्री की ओर से दलील देते हुए चंडीगढ़ के पूर्व सांसद और भारत सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने कहा कि लोकसभा चुनाव में तेजबहादुर का नामांकन चुनाव आयोग के नियमानुसार रद्द हुआ है। पीएम पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से गलत हैं। जज ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 4 सितंबर को फिर से मामले में सुनवाई का फैसला किया है।
सत्यपाल जैन ने बताया कि बीते लोकसभा चुनाव में वाराणसी संसदीय क्षेत्र से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ तेजबहादुर ने नामांकन किया था। तेज बहादुर वाराणसी संसदीय क्षेत्र के वोटर नहीं हैं। वहीं नामांकन के दौरान चुनाव आयोग की ओर से जारी सर्टिफिकेट दाखिल नहीं किया। इन कारणों से आयोग ने उनका नामांकन पत्र रद्द कर दिया। उसके बाद तेजबहादुर ने इस पूरी प्रक्रिया में प्रधानमंत्री पर पक्षपात करते हुए जबरन नामांकन रद्द करने का आरोप लगाया है, जो कि बिल्कुल गलत है।
साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के अनुसार किसी भी विजयी उम्मीदवार के चुनाव को चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती देने का अधिकार सिर्फ उम्मीदवार या वोटर के पास होता है। सत्यपाल जैन ने कोर्ट से निवेदन किया कि इस केस को तत्काल प्रभाव रद्द कर दिया जाए। हालांकि जज ने सुनवाई के बाद चार सितंबर को फिर से मामले में सुनवाई के लिए आदेश दिया है।