चंडीगढ़ में कोरोना और डेंगू के बीच अब जीका वायरस का भी खतरा मंडराने लगा है। डेंगू के कारण शहर में पहले से अस्पतालों के बेड फुल हैं, ऐसे में आसपास के प्रदेशों में जीका वायरस के केस बढ़ने से यहां भी संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब तक शहर में जीका वायरस के एक भी मरीज की पुष्टि नहीं हुई है फिर भी बचाव के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
उप स्वास्थ्य निदेशक डॉ. वीके नागपाल ने बताया कि जीका वायरस को लेकर ज्यादा तनाव लेने की जरूरत नहीं है। जहां तक हो सके मच्छरों से बचने का प्रयास करना होगा। घर और आसपास मच्छरों के पनपने के माध्यमों को नष्ट करें। जीका वायरस से संबंधित लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र या अस्पताल पहुंचें।
क्या है जीका वायरस आप भी जान लें
- ये वायरस संक्रमित मच्छरों के जरिए इंसानों में फैलता है। 60 प्रतिशत रोगियों में कोई लक्षण नहीं दिखता। इसे फैलाने वाला मच्छर चार मीटर तक ही उड़ सकता है।
- जीका वायरस मुख्यत: एडीज प्रजाति के संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। जीका वायरस संक्रमित गर्भवती महिला से उसके बच्चे को और खून के जरिए भी फैल सकता है।
- जीका वायरस से संक्रमित होने पर लाल चकत्ते, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कंजक्शनवाइटिस और आंखें लाल हो सकती हैं। आम तौर पर वायरस के लक्ष्य हल्के होते हैं।
- जीका वायरस से संक्रमित गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे में जन्म दोष और दूसरी तरह की न्यूरो संबंधी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।
शहर में अब तक जीका वायरस का कोई केस सामने नहीं आया है। जहां तक बचाव की बात है तो स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक स्तर पर तैयारी की है। मच्छरों के लारवा नष्ट करने के साथ ही उनके पनपने के माध्यमों को भी समाप्त किया जा रहा है। कोरोना हो या डेंगू या जीका वायरस, इनसे निपटने के लिए लोगों का सहयोग जरूरी है, तभी सफ लता मिल सकती है। - डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक