चंडीगढ़। कोरोना महामारी के चलते पीजीआई की ओपीडी 14 महीने से बंद है। जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 में भी कुछ दिन संचालन के बाद ओपीडी को फिर से बंद कर दिया गया है। ऐसे में नॉन कोविड मरीज मुसीबत में हैं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की तो जान पर बन आई है। लोगों का कहना है कि दिल्ली और पंजाब में ओपीडी खोलने का निर्णय लिया जा चुका है। ऐसे में चंडीगढ़ में नॉन कोविड मरीजों की अनदेखी की जा रही है।
विशेषज्ञ तो इस बात की भी आशंका जताने लगे हैं कि कहीं ऐसा न हो कि कोरोना से निजात मिलते ही अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों की स्थिति अनियंत्रित हो जाए और उससे होने वाली मौतों पर काबू पाने का कोई उपाय न बचे, इसलिए अब पीजीआई समेत अन्य अस्पतालों की ओपीडी खोल देनी चाहिए।
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अन्य बीमारियों से मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा
प्रशासन को सरकारी अस्पतालों की ओपीडी अब खोल देनी चाहिए, क्योंकि अन्य बीमारियों से मरने वाले मरीजों की तादाद कोरोना से कहीं ज्यादा है। ऐसे में अगर उन्हें और ज्यादा नजरअंदाज किया गया तो तीसरी लहर उनके लिए घातक साबित हो सकती है क्योंकि उनका मर्ज बेहद गंभीर हो चुका है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम है। ऐसे में वह संक्रमण की चपेट में आसानी से आ जाएंगे, इसलिए सरकार को ऐसे मरीजों के इलाज के बारे में भी सोचने की जरूरत है।
-डॉ. आरएस बेदी, एडवाइजर वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन
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नॉन कोविड मरीजों के इलाज की होनी चाहिए व्यवस्था
मुझे खुद त्वचा संबंधी परेशानी है। लगातार एक साल से ज्यादा समय हो गया मैं पीजीआई में इलाज के लिए परेशान हूं। टेलीकंसल्टेशन के लिए जो नंबर जारी किए गए हैं, वह कभी लगते नहीं। अब नॉन कोविड मरीजों के इलाज की भी व्यवस्था शीघ्र की जानी चाहिए।
- शशिकांत शर्मा, हल्लोमाजरा
अब खोल देनी चाहिए ओपीडी
जब कोरोना का पीक था तब ओपीडी बंद रखने का निर्णय सही था, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है। ऐसे में अब दूसरी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के बारे में सोचने की जरूरत है क्योंकि हर कोई लाखों रुपये खर्च कर निजी अस्पतालों में इलाज नहीं करवा सकता। उनके लिए पीजीआई जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान की ओपीडी खोल देनी चाहिए।
-किरण कुमारी, रामदरबार
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अलग अस्पताल बनाकर अन्य मरीजों का शुरू करें इलाज
अब ओपीडी बंद करने का फैसला मेरी समझ से परे है। अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की जान भी खतरे में है। अगर अब भी संक्रमण का खतरा है तो शहर में एक अलग नॉन कोविड अस्पताल बना देना चाहिए और अन्य बीमारियों से जूझ रहे गंभीर मरीजों का इलाज शुरू कर देना चाहिए। जब सर्जरी और अन्य विशेषज्ञता वाले डॉक्टरों का कोविड-19 के मरीजों के इलाज में कोई रोल नहीं है तो फिर उन्हें अन्य मरीजों का इलाज क्यों नहीं करने दिया जा रहा।
-बलजिंदर सिंह बिट्टू, चेयरमैन, फॉसवेक
जब दिल्ली और पंजाब जैसे राज्य अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के इलाज के लिए ओपीडी सेवा बहाल कर रहे हैं तो चंडीगढ़ में क्या समस्या है। फोन पर इलाज की सुविधा से मरीजों को कोई खास लाभ नहीं मिल रहा। मैंने खुद अपने पिता के इलाज के लिए कई बार पीजीआई में टेलीकंसल्टेशन से मदद लेनी चाही, मगर निराशा ही हाथ लगी। अब मैं निजी अस्पताल में उनका इलाज करवा रहा हूं।लेकिन हर किसी के लिए यह संभव नहीं है, इसलिए तुरंत सरकारी अस्पतालों की ओपीडी खोल देनी चाहिए।
हितेश पुरी, चेयरमैन, क्राफ्ड
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टेलीकंसल्टेशन सुविधा खुद बीमार
नॉन कोविड मरीजों के लिए पीजीआई प्रशासन ने टेलीकंसल्टेशन सेवा शुरू की है। इसके लिए पंजीकरण की समय सीमा कम होने से मरीज परेशान हैं। उधर, पीजीआई प्रशासन का कहना है कि संक्रमित मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण इस सेवा को सीमित किया गया है। स्थिति सामान्य होने पर इसे पहले जैसा कर दिया जाएगा। लेकिन इस टेलीकंसल्टेशन सुविधा का भी मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। पंजीकरण से इलाज होने तक मरीजों को 3 से 4 हफ्ते तक इंतजार करना पड़ रहा है। ज्यादातर मरीजों की शिकायत है कि पीजीआई हो या जीएमसीएच 32, टेलीकंसल्टेशन के लिए दिए गए नंबर हमेशा व्यस्त ही रहते हैं। लोगों का कहना है कि यह सुविधा मरीजों को इलाज क्या दिलाएगी, यह खुद ही बीमार है।
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14 महीनों से कर रहे इलाज का इंतजार
कोरोना के कारण 2020 से ही पीजीआई में स्थिति बेहद खराब है । 2019 में पीजीआई में जहां 51221 मेजर और 214055 माइनर ऑपरेशन किए गए थे। वहीं 2020 में यह संख्या क्रमश: 27950 और 52653 पर पहुंच गई। 2021 में स्थिति और गंभीर है। हजारों की संख्या में होने वाली सर्जरी दो से ढाई हजार पर पहुंच गई है। मौजूदा समय में केवल इमरजेंसी, ट्रामा व गायनी से जुड़े मरीजों की सर्जरी की जा रही है। अन्य सभी ओटी बंद कर दिए गए हैं। वहीं, जीएमसीएच-32 में जहां एक साल में 15 से 20 हजार सर्जरी हो रही थीं, कोरोना के कारण 2021 में अब तक महज 700 सर्जरी हुई है जबकि जीएमएसएच-16 में सर्जरी का दबाव ज्यादा न होने पर भी 90 सर्जरी पेंडिंग हैं। वहीं दूसरी तरफ, ओपीडी में आने वाले हजारों मरीज भी इलाज के लिए तरस रहे हैं। अकेले पीजीआई में देश के सात से ज्यादा प्रदेशों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के मरीज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल के भी काफी मरीज इलाज के लिए पीजीआई आते हैं।
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एक नजर पीजीआई की ओपीडी संख्या पर (2019 का आंकड़ा)
राज्य मरीज प्रतिशत
पंजाब 1087420 19
चंडीगढ़ 546468 37.9
हरियाणा 541764 18.9
हिमाचल प्रदेश 359273 12.5
उत्तर प्रदेश 133554 4.7
जम्मू कश्मीर 74131 1.2
अन्य राज्य 91970 3.2
कोट- कोरोना के साथ ही सामान्य मरीजों व जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ओपीडी बंद की गई है। सरकार के निर्देशानुसार उसे पुन: संचालित किया जाएगा। फिलहाल टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से मरीजों को परामर्श देने का क्रम जारी है।
- प्रो. जगतराम, निदेशक, पीजीआई
कोट- संक्रमण दर के नियंत्रण में आने पर प्रशासन के निर्देशानुसार फिर ओपीडी का संचालन किया जाएगा। फिलहाल टेली मेडिसिन व टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से मरीजों को परामर्श दिया जा रहा है।
-डॉ. जसविंदर कौर, डायरेक्टर प्रिंसिपल जीएमसीएच 32
कोट- सरकारी अस्पतालों में सभी ओपीडी बंद नहीं है। स्त्री रोग, बालरोग, हड्डी रोग व मेडिसिन के मरीजों को ओपीडी में देखा जा रहा है। जहां तक अन्य विभागों की ओपीडी खोलने की बात है तो उसे भी प्रशासन के निर्देशानुसार खोलने का निर्णय लिया जाएगा।
-डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक, स्वास्थ्य विभाग