चंडीगढ़। राय सिख जाति को 2007 से पहले जारी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र को वैध मानने के पंजाब सरकार के 15 जुलाई, 2021 को जारी सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका दाखिल करते हुए गुरप्रीत, पवन और बलबीर ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा से माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि राय सिख जाति पहले पिछड़ा वर्ग में थी। इस दौरान कई लोगों ने विभिन्न स्तर पर प्रयास कर अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र हासिल किए और शिक्षा व नौकरी में आरक्षण का लाभ लिया। केंद्र सरकार ने 29 अगस्त, 2007 को अधिसूचना जारी कर राय सिख/महातम जाति को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने का निर्णय लिया था। 2007 से पहले जारी जारी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने वाले लोगों के खिलाफ जांच जारी है। अब पंजाब सरकार ने 15 जुलाई को एक सर्कुलर जारी करते हुए 30 अगस्त, 2007 से पहले जारी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र को भी वैध मानने का निर्णय लिया है।
याची ने कहा कि अधिसूचना से पहले यह प्रमाणपत्र प्राप्त करना गैर कानूनी है और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी ही चाहिए। इसके साथ ही याची ने इस सर्कुलर पर रोक लगाने की तथा प्रमाणपत्र के आधार पर अनुसूचित जाति वर्ग में आरक्षण लेने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की है। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।